#Gazal by Vidhya Shankar Vidhyarthi

गजल

दिल से तुम दिल लगा के, इंकार कभी न करना
हाथों में तुम हाथ थमा के, इंकार कभी न करना

जो भी गीला हो मुझसे खुल कर के कह वो लेना
तारीफ में इतने मुस्कुरा के, इंकार कभी न करना

वादियों की दुनिया है जलने वाले मिलते हैं यहाँ
उनकी ना बात में आ के, इंकार कभी न करना

धड़कन जो तुम्हारी है वही है धड़कन हमारी
धड़कन की बात सुना के, इंकार कभी न करना

राहें हैं जिंदगी की, मिलते हैं रेत सफर में विद्या
रेत भी तुम हमें दिखा के, इंकार कभी न करना ।

विद्या शंकर विद्यार्थी

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