#Gazal by Vidhya Shankar Vidhyarthi

गजल

जिंदगी तुम मुझे अब वो गम न दे
खुशी दे, आँसू के वो मौसम न दे

किससे कहूँ मैं अपनी बातें सारी
मेरी हवा में भी कोई वहम न दे

सीधी हँसी से मेरी शिकायत क्या
किसी को हम दे, मुझे हम न दे

हँसी की हिफाजत तेरी बनती है
सीधी सांसो में कोई कसम न दे

मैंने देखी नहीं है कितनी चाँदनी
चाँद निकला है विद्या कसम न दे।

विद्या शंकर विद्यार्थी

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