#Gazal by Vidhya Shankar Vidhyarthi

गजल

नेह उनकर हमरा बेगाना बुझाइल
कवनो ना पता ठेकाना बुझाइल

आँखी में व्यथा झलक देई जाला
जिनगी के दरकल पन्ना बुझाइल

कांच के समुंदर में जिनगी अधूरा
ठेहून भर पानी में नेहाना बुझाइल

जामल घास पत्थर प कबो सुख जाला
मकरी के जाला में जाना बुझाइल

अइसने में दिल देेके घुटल दम करेला
विद्या के दरद में गोताना बुझाइल ।

विद्या शंकर विद्यार्थी

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