#Gazal by Vidhya Shankar Vidhyarthi

गजल

किस्मत संवर जब जाइत त हम कहतीं
जिनगी से पतझर जाइत त हम कहतीं

हँसे के हम कहतीं बोले के हम कहतीं
भंवर के लहर जब जाइत त हम कहतीं

कुहूँके किस्मत ना, कइले बा बेगाना
चलत सफर जब जाइत त हम कहतीं

ससबन्ह में पर के जीअल ना जीवन ह
लोग के जहर जब जाइत त हम कहतीं

सुर जोदय देखे के मन ना केकर हउए
धूप ना मुकर जब जाइत त हम कहतीं।

विद्या शंकर विद्यार्थी

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