#Gazal by Vidhya Shankar Vidhyarthi

गजल

 

भीड़ भरल बाजार में ईमान भूला गइल

सोत के संकोच में इंसान अकुला गइल

 

हाबी बा लोग गलत इहाँ, चोट दे रहल

फूले के जेकरा इहाँ अनजान फूला गइल

 

आँख मिला सके ना केहू भय बा बनल

बाँस के बाँसुरी के बनल तान हेरा गइल

 

धुआँ उठी कइसे कहीं आगे बा दबल

चैन सोचे लागल त अरमान सुता गइल

 

हादसा रोजे बा विद्या दिन होखे भा रात

संझवत बारे के बेर में अनुमान बुता गइल |

 

विद्या शंकर विद्यार्थी

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