#Gazal by Vijay Narayan Agrwal

( गजल जिन्दगी की)

 

रात रोशन हुयी ,कंठ  कौव्वाल है ।

जो उजाले  में था ,आज कंगाल है ।।

 

दिल की माशूक वो ,रात सोने न दे,

बंधनों से जकड़ कर, वो बेहाल है ।

 

ज्ञान भक्ती में शिव की, दिखी कल्पना,

जब  से  छाया  हिये ,उष्ण  भूचाल है  ।

 

सत्य संयम के द्वारा , नियोजित सुमन,

काम अग्नी से क्रोधित ,महाकाल  है ।

 

धर्म  संकट  में  पैदा , हुयी  आशिकी,

योग  तन्द्रा  से  रस का ,बुरा  हाल है ।

 

छोह   करती   नही, मोह   हरती  नही,

क्या “भ्रमर ” जिन्दगी ,एक  जंजाल है।।

 

विजय नारायण अग्रवाल  “भ्रमर” रायबरेली उ० प्र०

मो ० +919453510399

 

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