#Gazal by Vikash Raj

कहूँ कैसे कि मेरा यार बावफा होगा ,

कोई न जान सका है कि आगे क्या होगा ।

 

सभी के पैर के नीचे था जो कभी लोगों ,

वही है राह का पत्थर जो अब खुदा होगा ।

 

मेरी तरह हीं जमाने से प्यार करता है ,

वो मेरा यार है, मुझसे कहाँ जुदा होगा ।

 

मुझे खबर है मेरी जान हाले दिल मेरा,

जरूर तुमसे हवाओं ने हीं कहा होगा ।

 

बता रहे हैं ये अल्फ़ाज़ ऐ मेरे हमदम ,

तमाम दर्द तो शायर ने ही सहा होगा ।

 

विकाश‘, यूँ ही तेरे हाथ जल नहीं सकते,

कसूर कुछ तो चरागों का भी रहा होगा….।

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