#Gazal by Vikash Raj

 

फिर नया कोई ख्वाब क्यों संजो नहीं पाता हूँ मैं,

तुझसा तेरी याद को क्यों खो नहीं पाता हूँ मैं ।

 

यार ने अपना बनाकर इस कदर छोड़ा मुझे,

चाह कर भी अब किसी का हो नहीं पाता हूँ मैं ।

 

ना किसी से रश्क है ना इश्क है मुझको मियाँ,

फिर बताओ रात भर क्यों सो नहीं पाता हूँ मैं ।

 

जब भी जाता हूँ सनम गलियों में अपने यार के,

सब तो मिलते हैं मगर तुझको नहीं पाता हूँ मैं ।

 

हाय मेरी बेबसी जो अपने हाले दिल पे भी,

दिल बहुत करता है लेकिन रो नहीं पाता हूँ मैं ।

 

                                  ~>   Vikash Raj                       

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