#Geet by Aasee Yusufpuri

विरह गीत

 

मिलन ऋतु आइल मन गदराइल

बरखा के फुटेला झाग,

अंचरा में लागे न दाग़

रिम झिम बरसेला सगरो सवनवां

एही सवनवां में पिया के अवनवां

बइठल अटरिया पे काग

अंचरा में लागे न दाग़…

 

अगहन बीतल आइल पूस के महीनवां

एही महीनवां ह पिया से मिलनवां

डंसी अब न बिरहा के नाग

अंचरा में लागे न दाग़….

 

फगुवा क चढ़ते ही लोग घर आइल

गउवां में घरे घरे चइतो गवाइल

आवत होईहें हमरा सोहाग

अंचरा में लागे न दाग़…..

 

जेठ बईसखवा में देहियां जरेला

बिरहा क अगिया से हिया लहकेला

दहके करेजवा में आग

अंचरा में लागे न दाग़…..

 

रहिया निहारी थाकी जाला नयनवां

अइहें जे आसी कबो हमरो सजनवां

जागी जाई बिरहिन के भाग

अंचरा में लागे न दाग़……

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आसी यूसुफपुरी

 

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