#Geet by Acharya Amit

गीत:-

विरह की अग्नि
जलाए है प्रीतम….
विरह की अग्नि
जलाए है प्रीतम….
कौन यह अग्नि
बुझाए अब प्रीतम
विरह की अग्नि
जलाए है प्रीतम….
रात घनेरी जब
घिर -घिर आये
तन्हा यह तन्हापन
है मुझको सताए
रात घनेरी जब
घिर-घिर आये
तन्हा यह तन्हापन
है मुझको सताए
पास बुलाये यह
तुमको प्रीतम…..

विरह की अग्नि
जलाए है प्रीतम….

बिजली है चमकी
मन मे अंधेरा मेरे
कब हो सवेरा मेरा
समझ न आये
बिजली है चमकी
मन मे अंधेरा मेरे
कब हो सवेरा मेरा
समझ न आये
बरखा है देखो आई
तुम कब आओगे प्रीतम

विरह की अग्नि
जलाए है प्रीतम….
विरह की अग्नि
जलाए है प्रीतम….
कौन यह अग्नि
बुझाए अब प्रीतम
विरह की अग्नि
जलाए है प्रीतम….
आचार्य अमित

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