#Geet By Acharya Amit

गीत:

खुली हुई आंखें
यह तुम्हारी
हमको कह रही है
प्रीत यह तुम्हारी….

खुली हुई आंखें
यह तुम्हारी
हमको कह रही है
प्रीत यह तुम्हारी….
हसीन लब तुम्हारे
चूमने को तरसे हम
बैचेन सी रहती है
धड़कन यह हमारी….

खुली हुई आंखें
यह तुम्हारी
हमको कह रही है
प्रीत यह तुम्हारी…..

जबसे तुम्हें देखा है
बस में नही दिल मेरा
जबसे तुम्हें देखा है
बस में नही दिल मेरा
लरज़ते हुए होठों के पैमानें
भड़का रही है शोले
यह मेरी खुदखुमारी…..

खुली हुई आंखें
यह तुम्हारी
हमको कह रही है
प्रीत यह तुम्हारी…..

मेरी दुआओं का
तुम्ही तो सिला हो
कैसेैं कह दूं मैं
तुमसे खफ़ा हुँ
आये हो जबसे
तुम इस ज़िन्दगी में
महक सी उठी है
ज़िन्दगी यह हमारी…..

खुली हुई आंखें
यह तुम्हारी
हमको कह रही है
प्रीत यह तुम्हारी……

लोक लाज भुला कर
दिल तुमको यह दिया है
पत्थर की मूरत को
अपना खुदा किया है
तुम पर ही मरना है
चाहे जो भी हो सनम
अब तो यही ख़्वाहिश
हरसू है हमारी…..

खुली हुई आंखें
यह तुम्हारी
हमको कह रही है
प्रीत यह तुम्हारी….
आचार्य अमित

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