#Geet by Bhuvnesh Kumar Chintan

गीत

💐💐💐💐💐

भीग बरसात में,

धुल गये पेड सब,

वैसे इन पर कोई ,

जल चढाता नहीं।

कामना की नदी,

जब लगी सूखने ।

उसमें फिर कोई ,

गोता लगाता नहीं।।……..

 

माँगने के लिये,

तीर्थस्थल गये ।

माँगते माँगते ,

सब उमर खप गई।।

हाथ देने को लेकिन,

नहीं उठ सके,

धन कमाते हुए ही,

कमर झुक गयी।

मुझको बतलाइये,

ठीक समझाइये ।

माजरा कुछ समझ ,

मेरी आता नहीं ।।……..

 

भाव झूठे अगर,

मीत रूठे मगर ।

तब मनाना रिझाना,

अलग चीज है ।।

मन ने जब फैसला,

कर लिया हो गलत ।

कोई समझाये तब ,

बस उठे खीझ है ।।

लौट कर उन पलों,

को न फिर पाओगे।

जो चला जाये फिर,

लौट पाता नहीं ।।……….

 

चाँद की चाँदनी,

सूर्य की रोशनी ।

गीत फागुन के,

मन को सुहाते नहीं।।

खूब बादल घिरें,

और फुहारें गिरें।

मन में चिंता हो,

मन को लुभाते नहीं।।

कूक कोयल की मन,

को नहीं मोहती।

नाचना मोर का मन,

को भाता नहीं ।।……..

 

भुवनेश चौहान”चिंतन”

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