geet by Hitesh Choudhary

सजा है जनाजा मेरा, देखने तो आइये
उठाके कफन मेरा, जरा मुस्कुराइये
दीवाना आज तेरा, चला है जहां से
आखरी सफर है, रुखसत तो कीजिये
सजा है जनाजा मेरा….

साथ ले जा रहा हूँ, तेरे गम सारे
मिटी है हस्ती मेरी, शाद रहो प्यारे
एक है मेरी तमन्ना, तुझसे इल्तजा है
वीरां नजरों को मेरी, दीद तो दीजिये
सजा है जनाजा मेरा….

तेरे हो सके ना हम, यही गम तो ले चले है
उठाओ जनाजा के, मिटने को हम चले है
तुम ही हो कातिल, मगर किस तरह खड़े हो
आगे बढ़के इजाजत, जाने की दीजिये
सजा है जनाजा मेरा….

जले जब चिता मेरी, रूह से सदा: उठेगी
प्यार करने वालों की, चिताए सदा जलेगी
तेरे हाथों मिटने को, जहाँ में फिर आऊंगा
सलामत हो शायद कुछ, राख में देखिये
सजा है जनाजा मेरा….

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