#Geet by shivanand singh sahyogi

जिन्दगी कट गई

युक्ति अब तक कहीं
मिल न पाई मुझे
जिन्दगी कट गई
सुक्ति अब तक कहीं
मिल न पाई मुझे
जिन्दगी कट गई

पीढ़ियों के कहे
मार्ग पर ही चले
मंदिरों तक गये
सीढ़ियों पर चढ़े
कष्ट झेले बहुत
मूर्तियों तक गये
देवतागण मिले
मोतियों से जड़े
देख आँखे भरीं
मुक्ति अब तक कहीं
मिल न पाई मुझे
जिन्दगी कट गई

कर्मकाण्डों के घर
फिर गये हर जगह
मर्म ने जब कहा
पाप कहते जिसे
रोज धोया उसे
खास गंगा नहा
धर्म की डोर से
पग बँधे ही रहे
हर समय अब तलक
तृप्ति अब तक कहीं
मिल न पाई मुझे
जिन्दगी कट गई

शौक है तो बहुत
गीत गाया करूँ
एक गायक बनूँ
आदमी बन सकूँ
नेकनामी मिले
और लायक बनूँ
बचपना जब बढ़ा
उस नये मोड़ पर
मोह-माया मिलीं
शांति अब तक कहीं
मिल न पाई मुझे
जिन्दगी कट गई

एक छतरी मिली
नीलिमा जो लिए
एक दीया जला
कुछ अँधेरा लिए
रोशनी जो मिली
वक्त बदले कला
मंजिलों के लिए
बढ़ चले हैं कदम
अब तमस साथ है
कीर्ति अब तक कहीं
मिल न पाई मुझे
जिन्दगी कट गई

शिवानन्द सिंह “सहयोगी’ मेरठ

546 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.