geet by surendr kumar singh chance

सूनी सुनी गलियाँ है सन्नाटा है
गर्म हवा का झोंका आता जाता है
तुम चाहो तो उड़ते मेघ बरस जायें
सन्नाटे में बुलबुल गीत चहक जायें
उलझी उलझी गलियों में
अनजाने अनजाने हम
जिसने अपना समझा था
उससे भी बेगाने हम
अब तो ऐसा लगता है
बस तुमसे ही रिश्ता है
सहमा सहमा जीवन है अफ़साना है
फिर भी बुनता रहता ताना बाना है
तुम चाहो तो उलझ जीवन खिल जाये
ताने बाने में भी मंजिल मिल जाये
एक कदम चलते हैं
फिर गिर जाते हैं
आँख जरा सी खुलती है
फिर सो जाते हैं
आस हवा में उड़ती है
शबनम क्या क्या कहती है
हिलता डुलता जीवन है घबराना है
तूफानी लहरों का आना जाना है
तुम चाहो तो दिल की आग धधक जाये
बिराने में चलती श्वांस महक जाये।
कलियो की मुस्कान
देख शर्मा जाते है
भौरों के गुंजन से
ही घबरा जाते है
जाने कैसा सपना है
बस तू ही तो अपना है
काली काली रातेँ है अँधेरा है
दूर शहर में मेरे चाँद का डेरा है
तुम चाहो तो काली रात पिघल जाये
अँधेरे में मेरा चाँद निकल जाये।

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