#Geet by Dr Mohan Tiwari

तुमने लाज बचाई आकर
द्रुपद सुता की श्याम।
आज हुए क्यों चुप
जब चारों ओर मचा कोहराम।।

श्याम तुम्हारी बहन-बेटियाँ
आज सताईं जातीं।
करुण पुकार लगाकर
तुमसे मदद की भीख मगातीं।।
क्या तुम भी असमर्थ हो रहे,
कुम्भकर्ण की नींद सो रहे।
या फिर भूल गये हो कान्हा,
परहितकारी काम।
आज हुए क्यों चुप
जब चारों ओर मचा कोहराम।।
तुमने लाज बचाई आकर
द्रुपदसुता की श्याम।।

आज आदमी क्यों मानव से,
दानव बनता जाता।
क्यों सज्जनता छोड़,
दुष्टता का लक्षण अपनाता।।
क्यों पशुता को अपनाता है,
सदाचार लुटता जाता है।
क्यों अच्छाई छोड़,
बुराई का बन रहा गुलाम।
आज हुए क्यों चुप,
जब चारों ओर मचा कोहराम।
तुमने लाज बचाई आकर
द्रुपदसुता की श्याम।।

नारी की अस्मत पर
भूखे बने भेड़िया टूटें।
ये बेशर्म अबोध बालिकाओं
की इज्ज़त लूटें।।
सुनकर इनकी घृणित कहानी,
सोच हो रही पानी-पानी।
मुँह से कुछ भी कहा न जाता
सोच-सोच मन उकता जाता।
असमंजस में हूँ कैसे तुम,
चुप बैठे घनश्याम।।
आज हुए क्यों चुप जब
चारों ओर मचा कोहराम।
तुमने लाज बचाई आकर
द्रुपदसुता की श्याम।
आज हुए क्यों चुप
जब चारों ओर मचा कोहराम।।

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