#Geet by Dr Prakhar Dixit

गीत

मे और मेरी कविता

मेरी कविता पीड़ा गढती मैं मन को नहीं झुका पाता हूँ।

कर्तव्यबोध संकल्प मनस में राष्ट्रघोष की जय गाता हूँ।।
नहीं लेखनी लिखे कल्पना और न गजरा धुन पायल की।

अंलकार के साजिंदों को पता नहीं गत क्या घायल की।।

सीमा की पाती आंगन में मैं विह्वल भाव सुनाता हूँ।।

मेरी कविता पीड़ा गढती मैं…
चारण वंदन भाट जयति से भला अदब का हो पाया क्या।

श्रृंगार रीति प्रमाद परोसा सोचो क्या पाया खोया क्या।।

हुए निरुत्तर प्रश्न उन्हीं का विप्लव राग बजाता हूँ।।

मेरी कविता पीड़ा गढती मैं…
सिंहनाद कर्तव्य पंथ पर राष्ट्रप्रेम का कर अवगाहन।

भारतमाता हेतु समर्पण कोटि सूर्य आभा उदयायन।।

प्रखर कीर्ति नित गढे लेखनी आगत स्वप्न सजाता हूँ।।

मेरी कविता पीड़ा गढती मैं…
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प्रखर दीक्षित
फर्रूखाबाद

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