#Geet by Dr Prakhar Dixit

आली ! प्रणयन सत्य हवन है।।

तुम्हीं प्रेम का दीप प्रज्जवलित
तुम्हीं रश्मियों में सम्मिलित-
मैं हद पर हूँ तुम आंगन में,
ह्रदय विदीर्ण बहुत क्रंदन है।।

तिल तिल कर विपदाऐं गलेगी
यहाँ न जाने कब शाम ढलेंगी
भारत माँ की रक्षा खातिर,
अर्पित मेरे प्राण अरु प्रन है।।

जब जब मुझको याद सताती
तब लिखता आँसूं से पाती
तुम्हीं सपन साकार हो मेरा
अर्धांग तुम्हारा जीवन धन है।।

तुम सौरभ मेरी सांसों की
मूर्तिमान मेरी हासों की
तुम संबल तुम साहस प्रेयसी
तुम बिन जीवन बहुत कठिन है।।

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