#Geet by Mukesh Bohara Aman

नवगीत

 

 

मेघ बरसो , मेघ बरसो

 

 

मेघ बरसो, मेघ बरसो ,

ओ ! निराले मेघ बरसो ।

 

 

खेत, सरोवर,

कुंज, कालिया ,

जल बिन सुनी ,

प्रीत गलियां ,

 

ओ! गगन के पूत प्यारे ,

आओ काले मेघ बरसो ।

 

 

पनघट के पथ,

के सन्नाटे ,

बहुत अखरते,

आते-जाते ,

 

पीर पनिहारिन, विरहन की,

ओ! अलबेले मेघ बरसो ।

 

 

बूँद स्वाति ,

बनते मोती ,

तुम चातक की,

नयन ज्योति ,

 

प्यासी धरती, शून्य गाती ,

ओ! सावन के मेघ बरसो ।

 

 

 

मुकेश बोहरा अमन

नवगीतकार

बाड़मेर राजस्थान

8104123345

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