#Geet by Munish Bhatia Ghayal

खुश्क नजरों के पैमाने हो गए

आज हर घर में ही थाने हो गए

कहती बीवी मैं ही थानेदार हुं

आज गुंडों की मैं ही सरदार हुं

हम ही बस हम ही निशाने हो गए

आज हर घर…..

सास कहती है बड़ा कमबख्त तुं

लड़ता बेटी से मेरी हर-वक्त तुं

पल-पल मुश्किल में बिताने हो गए

आज हर घर……

साले की धमकी मिले हरदम हमें

आंकता है क्या तुं साले कम हमें

आंख दो होते भी काने हो गए

आज हर घर…….

क्या करुं जाऊं कहा कोई दे बता

शादी की है की नहीं कोई खता

जख्म घायल के पुराने हो गए

One thought on “#Geet by Munish Bhatia Ghayal

  • May 6, 2017 at 5:35 am
    Permalink

    आप भला तो जग भला

    बहुत खूब!

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