#Geet by Om Agrwal Babua

समर्पण🌹

नारी को सम्बोधित एक धराप्रवाह गीत

 

तुम नेहनयन की आशा हो

तुम जीवन की परिभाषा हो

तुम हो देवी गीतों की

तुम देवी प्रीत प्रतीतों की

तुम इन आँखों का पानी हो

तुम बचपन और जवानी हो

तुम ख्वाब बड़ा ही प्यारा हो

तुम सच्चा एक सहारा हो

तुम भूख प्यास मे जीती हो

तुम अश्रु लहू के पीती हो

तुम भूखे नंगों की बोली

तुम पाप निकंदन की होली

तुम नेह स्नेह की मलिका हो

तुम स्वयं सुवासित कलिका हो

तुम देवी हो अरमानों की

तुम चाहत हो परवानों की

तुम दीपपुँज हो ज्योती हो

तुम सिंधुसुधा का मोती हो

तुम शिखरों की ऊँचाई हो

तुम सागर की गहराई हो

तुम निर्बल की बाहें हो

तुम मंजिल की राहें हो

तुम अर्जुन का तीर भी हो

तुम रांझा की हीर भी हो

तुम देश धरा की आशा हो

तुम समाधान जिज्ञासा हो

तुम प्यासों का पानी हो

तुम अनुपम एक कहानी हो

तुम बच्चों की क्रीड़ा हो

तुम बूढ़ों की पीड़ा हो

तुम सत्य कृष्ण की मीरा हो

तुम सच मे सच्चा हीरा हो

तुम नदी का बहता पानी हो

तुम ज्ञानी हो विद्वानी हो

तुम मलयागिरि का चंदन हो

तुम सच मे ताप निकंदन हो

तुम रूप रंग की रानी हो

तुम सच मे बड़ी सयानी हो

तुम भोली हो तुम भाली हो

तुम अपने आप सवाली हो

तुम सच मे बेहद प्यारी हो

तुम इक अनुपम नारी हो

……….अंतहीन

ओम अग्रवालः बबुआ

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