#Geet by Rakesh Parihar Ranjha

गीत

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बस छू लेना थोड़ा सा

भले ही टूकड़े ना उठाना

बिखरा पड़ा हूँ जर्रा जर्रा

एक बार देखकर तो जाना

बस छू लेना थोड़ा सा…..

 

नाजुक काँच की थी दिवारें

अब उसमें भी पड़ी दरारे

ऐसे साथ है दर्द ये सारे

भूला कब आई थी बहारे

जख्मीं हो जाएगें पैर तुम्हारे

यूं दिल को ठोकर ना लगाना

बस छू लेना थोड़ा सा…..

 

दिल में जो साये रहते है

रातभर मुझे जगाये रहते है

दिन दोपहर या हो कोई पहर

हम तेरे ही सताये रहते है

अब दिल ने हिम्मत हारी

अब बस भी करो सताना

बस छू लेना थोड़ा सा…..

 

उदासी छाई है आजकल

नही रहती है चहल पहल

शेर भी रहते है घायल

ना मर जाए कही गज़ल

कुछ अफसाने लिखने है

सुनो आकर तो जरा सताना

बस छू लेना थोड़ा सा….✒……राकेश परिहार “राँझा”

,जोधपुर (राज०)

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