#Geet by Shashi Tiwari

दिल मे अनबुझी आग है,

मगर आँखों मे बरसात है,

ओ छोड़ गया ज़ालिम,

उसकी यादें मगर साथ है।

 

आज फ़िर एक जनाज़ा उठा,

प्यार करने वालो का,

दर्द लहू निचोड़ेगी

रूह रुख़सत हुई आज है।

 

महफुज नहीँ हैं कही,

छोटी छोटी सी बच्चियां,

हर शक्ल दरिंदा है,

उनकी कोई नही जात है,।

दिल मे अनबुझी,,,

 

शशि तिवारी, महुवा,

 

 

मैं तेरी चाँद हु तू रात बन जा,

मेरे खामोश लबों की बात बन जा,

 

ना बहारो, विरानों की दहशत हो,

मैं कली तो तू पात बन जा।

 

शशि तिवारी, महुवा,

 

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