#Geet by Sushila Joshi

गीत ….

 

कालिख से फ़ूट चली

सिहरन

झुक आयी सांझ तले

दरकन ।।

 

विश्वास अडिग की

धारा में

मन विपुल चूमता

तारामय

चढ़ता गिरता

मझधारा में

थक बैठी देह

निराशा में

 

लाली से फूट चली

सिसकन

रुक गयी होठ की

नव हर्षन ।।

 

 

आनन की कर्कश

सिकुड़न में

दृष्टि दर्पण फिर

बोझ बनी

नव अभिलाषा के

बन्धन में

पल पल आदेश के

शोध सनी

 

नदियों में फूट  चली

धड़कन

थक गया  नैन का

संघर्षण ।।

 

सुशीला जोशी

मुजफ्फरनगर

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