#Geet by Sushila Joshi

जीती रही जिंदगी फिर भी
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कई हलाहल पी कर बैठी
जीती रही जिंदगी फिर भी ।।

बिना किये की
करनी धरनी
चले सड़क पर
सहने भरनी
जीभ हलक से
लगी हुई थी
सिसक रही थी
कथनी करनी
घाव हृदय के सी कर बैठी
जीती रही जिंदगी फिर भी ।।

खामोंखां की
धौस मन्ववत
और लिए थी
तोहमद सँग
उलट फेर के
फेरे में आ
रँग हो गए बेरंग
क्षत विक्षत कगार पर बैठी
जीती रही जिंदगी फिर भी ।।

रहे दिखाते
सदा उंगलियां
खिली रही
फिर भी कलियाँ
रहे देखते
टेढ़े हो कर
भरी रही सब
फिर भी गलियां
मौन कल्पना ले कर बैठी
जीती रही जिंदगी फिर भी ।।

सुशीला जोशी
मुजफ्फरनगर

One thought on “#Geet by Sushila Joshi

  • November 12, 2018 at 10:58 am
    Permalink

    गीत प्रकाशित करने का बहुत बहुत आभार ।

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