#Geet by Sushila Joshi

मेरे मन आँगन में

तुम गन्ध द्वार से आये
मेरे मन आँगन में ।
तुम मंद मंद मुस्काये
मेरे मन आँगन में ।।

जब जब भी मूंदी है
मैंने अपनी पलकें
तुम विराट से आये
खोले अपनी अलकें
तुम गीत संग में लाये
मेरे मन आँगन में ।।

आगे बढ़ कर जब भी
मैंने तुम्हें पुकारा
नए रूप में आ कर
तुमने मुझे दुलारा
तुम अंग अंग अकुलाए
मेरे मन आँगन में ।।

हृदय दृष्टि से जब जब
मैंने तुम्हे निहारा
अंधकार में आ कर
तुमने मुझे उबारा
नव रँग रँग छलकाए
मेरे मन आँगन में ।।

विस्फारित नयनो को
जब भी मैंने बांधा
तुमने छू अंतर को
मम साँसों को साधा
अनुराग रूप तुम छाए
मेरे मन आँगन में ।।

सुशीला जोशी
मुजफ्फरनगर

One thought on “#Geet by Sushila Joshi

  • October 14, 2018 at 5:13 am
    Permalink

    अपनी वेबसाइट पर स्थान देने के लिए हार्दिक आभार ।

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