#Geetr By Bhuvnesh Kumar Chintan

*  गीत*

 

हमें अपने नहीं मिलते,

मधुर सपने नहीं मिलते ।

जो मिलते हैं मशक्कत से,

वो मिलकर भी नहीं मिलते।।

 

न कोई बारिशें बरसीं ,

न कोई बिजलियाँ कौंधी।

उडा कर ले गया कोई,

धरा की गंध थी सौंधी।।

 

करेंं हैं यत्न बहुतेरे ,

मगर दीपक नहीं जलते ।………

 

सियासत की हकीकत को,

समझ कर भी नहीं समझे ।

बहुत कुछ तुम नहीं जाने,

बहुत कुछ हम नहीं समझे ।।

 

समझते भावनायें यदि ,

तो ये आक्रोश ना पलते ।…………..

 

 

तुम्हारी बात तुम जानो,

हमारा क्या है कह लेंगे।

नहीं ख्वाहिश तुम्हें है तो,

तुम्हारे बिन भी रह लेंगे।।

 

कि “चिंतन “लेखनी से अब,

मुखर अक्षर नहीं ढलते।……….

 

भुवनेश चौहान “चिंतन”

भक्ति व ओज कवि

खैर, अलीगढ, उ.प्र.(भारत)

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