#Haiku by Dinesh Pratap Singh Chauhan

हाइकू (5 -7 -5)

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धन तो छोडो

न दे सके दुआ भी

गरीब वह

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दूर हो भले

पर सोचे भला ही

करीब वह

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प्रयास करें

और फले ही फले

नसीब वह

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धन कम हो

देने का भाव बड़ा

अमीर वह

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तन के साथ

रूह भी शीतल हो

समीर वह

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धर्म के लिए

हानि लाभ न सोचे

है वीर वह

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समय का जो

न माने शासन

अधीर वह

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कंठ की प्यास

देह का दाह शान्त

है नीर वह

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सूक्ष्म को ढके

जीवन रस चखे

शरीर वह

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“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

 

 

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