haiku by Jyoti Mishra

* नारी *

 

अबला नारी

अंतहीन लाचारी

हाय बेचारी

 

छटपटाई

रोई, गिड़गिड़ाई

न सुनवाई

 

 

बदला वक्त़

मिला खुला आसमां

निकले पंख

 

भरे उड़ान

जागृत  स्वाभिमान

है पहचान

 

छाई मुस्कान

मुट्ठी में आसमान

पाया जहान …!!

 

🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥

 

निकला चांद

देखती रही

हो नयनाभिराम

 

फैली चांदनी

महकी रातरानी

भीगी चाहतें

 

नदी  किनारे

पिया राह निहारे

लिए सितारे

 

मिला साथ

लिए हाथों में हाथ

गुजारी रात

 

खिला कमल

तन -मन निर्मल

प्रीत नवल

 

उगा सूरज

चमका  उजियारा

लगता प्यारा !!

 

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