#Haiku by Kapil Jain

हाइकु

___ ※ दीपक ※ ____
(हायकु)
माटी का दीया
करे उजाला दान
तिमिर पान

माटी का दीया
सुर्य़ का वशंधर
प्रकाशमान
खुशी मनाए
आओ हर दिल मे
दीप जलाए
सबके दीप
है अलग थलग
उजाला एक
दीप ज्योति से
आत्मा दिव्य प्रकाश.
छू ले आकाश..
दिवाली रात
मिले दीप से दीप
हो गई प्रात.

मृण्मय दीप
दे जग उजियारा
तम को जीत
दिये मे बाती
महलो मे रोशनी
सीप मे मोती
अधेंरे द्वार
दियों का उपहार
बन्दनवार
दीपक की लो
जीवन का पाथेय.
ज्योति विधेय..

तिमिर रात
दीपक की लगन
उगा दे प्रात..
देता रोशनी
जलाकर दीपक
तन बदन
दीप लगन
तम को दॆता मात
जला के तन
शत् चिराग
उजियारे का वास
तम का नाश
जल के मरी
खुद से ईर्ष्या कर
दिये की बाती
मन का दिया
जला अन्तसः आस
छु ले आकाश

अन्तसः आग
लगाकर दीपक
देता उजास

सुख समृद्धि
हो इस दीपावली
जन जन मे

करो रोशन
बूझते चिरागों को
इस दिवाली
है धूम धाम
कार्तिक अमावस्या
दिवाली शाम
चमक उठे
झिल- मिल करते
दिवाली दिये
हो तेरी लौ से
पवित्र गलियारे
दिवाली दिये
दे उजियारा
नफरत मिटा के
दिवाली दिये

ज्योति जगा दे ,
दिल की बगिया में
दिवाली दिये
हो प्रज्वलित
हर घर द्वार पे
दिवाली दिये
ना अंधेरा हो
ना कोई भूखा सोए
इस दिवाली

आप सभी को
दिवाली मुबारक
ज्योतिर्गमय
कपिल जैन

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