#Haiku by Rajeshwari Joshi

मन दर्शन
अनुभव हीनता
तथ्यों का घाव

पहली सोच
उद्वेलित समझ
गलघोटू सा

शब्दों की फ़ांस
चुभी थी अंतर्मन
खोखली हंसी

जीवन दर्प
डगमगाते पग
बीहड़ राहे

ढहा घरोंदा
अल्प सी अंतहीन
नांदा सोंच थी

बिखरा हुआ
सन्नाटो भरा शोर
गूँजते शब्द

जहाँ मिलेंगा
नई उम्मीदे भरा
नया आसमां

प्रखर सोच
आंदोलनरत हो
नये आयाम

स्थापित हो
स्वयंभू मानिंद
हर्षारीतेक

राजेशवरी जोशीआर्द्रा

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