#Ishwar Dayal Jaiswal

बसंत °°°°°°°°°°°

बसंत !
नववर्ष का आगमन ,
आमों की डालों पर
कूक उठती है कोयल ,
भर देता है – मनुष्य के दिल में
खुशियों का सागर।
वह
झूमता है, गाता है ,
खेलता है ,
रंग- विरंगी होली।
लेकिन !
साथ ही आता है
पतझड़ ,
हरी – हरी डालियां ,
सुकोमल पत्ते ,
हो जातें हैं –
निरीह! निराश !!
हम करतें हैं
उनका उपहास ।
क्या हम मानव
सोचते हैं –
उनके दुखों को
अपने सुखों के समक्ष ?
शायद नही !
कभी नही !!

~~ईश्वर दयाल जायसवाल ,
टांडा- अंबेडकर नगर ( उ. प्र.)

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