#Jokes by PRATIK PALOR (DARPAN)

मास्टर जी पूछण लागे “Inconvenience का Opposite बताओ”

मैंने कही “गुरूजी, Out-Convenience”

इतिहास गवाह है, गुरुजी ने ताळी सदा म्हारे गाल पे ही ठोकी है

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मैडम जी ने पूछ्या: “पर उपदेश कुशल बहुतेरे” का अर्थ बताओ??

मैंने तपाक से कही: “सास कहती है कि हे बहू! तेरे उपदेश दूसरों पर ही अच्छे लगते है।” अर्थात् मुझे ज्ञान ना दिया कर।

मैडम जी की आँख्याँ में आँसू देखे थे हम ने

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लगता है लोगों को ग़लतफ़हमी हो गई है कि

कोई पोस्ट अपने हाथ से Forward ना करो तो पाप लगता है

या करने से कोई माता जी, पिता जी या भैरू जी प्रसन्न हो जाते हों

कहीं कोई Balance बढ़वाने वाली Scheme हो  तो हमें भी बताओ

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वो रईस कभी ख़ुद खाना ना बनाने वाली बीवी को बाहर खाना खिलाने ले जाएँ तो Dinner Date

हम ले जाएँ तो बीवी कामचोर

समरथ को नहीं दोस गोसाईं

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वो सुनहरा पल जब Super Boss आप के Boss को आप के सामने वैसे ही धोबी पछाड़ मारता है, जैसी आप अपने Boss से कई बार खा चुके हैं

नहीं समझ आया तो Boss को पढ़ा के देख लो

शादी के पहले पिता, शादी के बाद माँ और बच्चों की शादी के बाद पत्नी के दुनियादारी और क़ायदे सम्बन्धी ताने सहते हैं

तबला नर हाय तेरी यही कहानी,

ना आँचल में दूध ना आँखो में पानी

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सबसे ज़्यादा तो विज्ञापन बनाने वाले “सही पकड़े हैं”

लड़कों को लड़की देखने लायक बनाओ और लड़कियों को आईना

कम से कम वादा तो करते ही हैं

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हाँ भई, सब सीधी क़तार में खड़े हो जाओ

कल किसी दूसरे समूह में चुटकुले पढ़ने की आपाधापी में भगदड़ से चार सौ लोगों के बुरी तरह से लोटपोट होने की ख़बर मिली है

हास्यानुशासन

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