#Kavita by Anantram Chaubey

पिता दिवस

 

पिता पिता

होता है ।

ऊपर से

कठोर ।

अन्दर से

नरम होता है ।

घर की

छत्रछाया

होता है ।

माँ बच्चो का

नाम पिता से

जुड़ा होता है ।

घर मे पिता हो

सब चैन से

सोते है रहते है ।

पिता के रहने का

आभार हिम्मत

हौसला बढाता है ।

पिता बस पिता

ही होता है ।

पिता के साथ

बेटी सुरक्षित

निडर रहती है ।

घर के आँगन

मे बुलबुल सी

फुदकती है ।

पिता के साये मे

निश्चिंत होकर

रहती है ।

माँ कभी जब

डाँटती है ।

पिता से

शिकायत

करती है ।

पिता की लाडली

बेटी ही तो होती है ।

शादी के वाद में

बेटी को पिता का

घर बाबुल का

हो जाता है ।

ससुराल मे जाकर

पिता के रूप मेय

ससुर का घर

मिल जाता है ।

अनन्तराम चौबे

*  अनन्त *

जबलपुर म प्र

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