#Kahani by Ajay Jaihari Kirtiprad

जंगल की रक्षा

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रामू बंदर आज बहुत परेशान था। जंगल के सारे जानवर और पशु पक्षी आज जंगल छोड़कर जा रहे थे। हाथी दादा अपना सामान समेट ही रहे थे की रामू वहाँ पहुँचकर पूछने लगा। क्या यह ठीक हैं। जहाँ हमारे पुरखों ने अपना जीवन बिताया उसे छोड़कर जाना। दादा ने कहाँ हम कर भी क्या सकते जंगल के सारे पेड़ सूख चुके हैं ऐसी हालत में पर्याप्त छाया व फल भी नहीं रहे अगर हम यहाँ रहे तो जंगल के अधिकतर जानवर व पशु पक्षी दम तोड़ देगें। सुना था कल शहर से कुछ अफसर लोग यहाँ आये थे और बाकी बचे पेड़ों को काटकर  कोई बड़ा खारखाना खोलने की बात कर रहे थे, तो दादा क्या हमें अब ये दिन भी देखना पड़ेगा और हमारे अपनों से भी हाथ धोना पडे़गा। नहीं दादा आप और जंगल के अन्य जानवर जंगल को इस तरह छोड़कर नहीं जा सकते हमें आवाज उठानी होगी जंगल को बचाना होगा। आपस में मिलकर एक एक पेड़ फिर से लगाना होगा, शहर के अफसरों को किसी भी तरह रोकना होगा, हाथी दादा को बात जम गई । पास ही के आम के वृक्ष पर बैठी काली कोयल से हाथी दादा ने कहा तुम जाकर जंगल के सभी जानवरों को सूचना कर दो की बड़े बरगद के पेड़ के नीचे आज शाम को एक सभा रखी गई है, वहाँ सभी को पहुँचना हैं। हाथी दादा और सोनू बंदर जंगल के मुखिया शेरु के साथ सभा की तैयारी में लग गये। काली कोयल जहाँ भी जाती अपनी मीठी आवाज मेंं कहती “सुनों सुनों सब मेरे भाई, जंगल पर है आफत आई, हाथी दादा और शेरु ने , बरगद के नीचे सभा बुलाई, इसमें हैं हम सब की भलाई” जगंल के सभी जानवर पहले ही बहुत डरे हुये थे और अब इस खबर ने उन्हें और परेशान कर दिया सो सभी ने एकदिन के लिये जंगल छोड़कर जाने का प्लान केंसल कर दिया तथा वापस अपने अपने घरों को  लौटकर शाम की सभा में जाने की तैयारी शुरु कर दी। शाम को तय समय पर जंगल के समस्त जानवर व पशु पक्षी बरगद के पेड़ के नीचे इकट्ठे हुये। सोन चिरैया ने आगे बढ़कर सभी का हार्दिक अभिनंदन व स्वागत किया जंगल के मुखिया शेरु को सभी का नैतृत्व करने व सिंहासन पर बैठने के लिए ससम्मान आमन्त्रित किया गया और हाथी दादा को जंगल के समस्त जानवरों व पशु पक्षियों के समक्ष अपना विषय रखने के कहा गया व बंदर सोनू को इसका लिखित स्पष्टीकरण रखने के लिए कहा गया। हाथी दादा ने जंगल के समस्त जानवरों व पशु पक्षियों के सम्मुख अपनी बात रखते हुये कहा दोस्तों ये हमारे लिए चिंता का विषय हैं की भयंकर गर्मी व पानी की कमी से जंगल के काफी सारे वृक्ष सूखकर बेजान हो गये हैं ,जिससे उनमें फल लगना तो दूर हरी पत्तियाँ आना भी बड़ी बात हैं, और हम जंगल के जानवर व पशु पक्षी भी इन पर ही निर्भर हैं, अगर हम सब को भूखों नहीं मरना और सदैव इस प्रकृति के साथ ही जुड़े रहना है, तो कैसे भी करके इसको नष्ट होने से बचाना होगा तभी हम आने वाली पीड़ियों को एक सुरक्षित व उज्जवल भविष्य दे पायेगें अन्यथा हमें यह जंगल छोड़कर दूसरी जगह जाना होगा या फिर शहर से आये अफसरों को यहाँ से कैसे भी रफादफा करना होगा और जंगल के प्रत्येक जानवर व पशु पक्षी को कम से कम एक एक पौधा लगाना होगा और पेड़ बनने तक उसकी सुरक्षा भी करनी होगी और इस पर जल्दी विचार करना होगा, हाथी दादा कुछ और कहना ही चाहते थे की इतने में लट्टू खरगोश बीच में ही बोल पड़ा पर इतने पौधे लायेंगे कहाँ से जंगल के सारे पौधे व बीज तो नष्ट हो गये हैं,इतने में जंगल की सबसे बड़ी चतुर ढोलकी बीच में बोल पड़ी नथ्थू कौआ हैं ना सुना हैं शहर मेंं इसका कोई मित्र हैं जिसके पौधों की दुकान हैं उसके पास एक से एक पौधे हैं जो बड़े होकर फलदार या छायादार पेड़ बनते हैं, जिससे हमारे जंगल की समस्या बड़ी आसानी से हल हो सकती है। लोमड़ी की बात सबको पसंद आई और सबने इस एबज में की ऐसा ही होगा जोरदार तालियां बजाई। हाथी दादा व जंगल के मुखिया शेरु ने इस पर अपनी गरदन हिलाते हुये  सहमति प्रकट की  व अगले दिन इसके लिए एक समिति बनाने की बात कही और सभा में पधारे हुये लोगों को बहुत बहुत धन्यवाद प्रेषित किया। सभी लोग अपने अपने घरों को चले गये। रात के दो बज गये थे सोनू बंदर अभी भी कुछ बैठा बैठा सोच रहा था। इतने में नथ्थू कौए ने आवाज लगाई क्या सारी जागकर जागरण करना हैं सोना नहीं ,सोनू थोड़ा चोका फिर बोला तुम भी तो सोये नहीं दरसल में कल के बारे में सोच रहा था, बाकी सारे काम तो हो जायेंगे पर उन अधिकारियों का क्या करेंगे जो जंगल के सारे पेड़ काटकर यहाँ कारखाना खोलने की बात कर रहे थे नथ्थू बोला बस इतनी सी बात वो सब तू मुझ पर छोड़ दे, वक्त आने पर उनको ऐसा सबक सिखायेंगे की दोबारा जंगल की ओर मुड़कर नहीं देखेंगे, ठीक है भाई मैं तो अब सोने चला और तू भी अब सोजा, कल सवेरे जल्दी उठना हैं और बहुत सारा काम भी करना हैं शुभरात्री। अगले दिन सभा में सभी जानवर व पशु पक्षी इकट्ठा हुए और सबके आपसी विश्वास से एक छह  लोगों की समिति का गठन हुआ। समिति में हाथी दादा को नेतृत्वकर्ता, सोनू बंदर को लिखित योजना संग्रहण कर्ता, नथ्थू कौए को योजना कर्ता, लट्टू खरगोश को कार्यवाहक और काली कोयल व उसकी सहयोगी  सबसे चतुर ढोलकी लोमड़ी को संदेशवाहक का पद सोपा गया व समस्त जंगलवासियों को इनका सहयोगी बनाया गया। हाथी दादा ने नथ्थू कौए की योजना से सबको वाकिफ कराया। सोनू बंदर ने इसका लिखित प्रतिवेदन तैयार कर दिया। काली कोयल व चतुर लोमड़ी ने इसे सभी तक पहुँचा दिया। सभी जंगल की रक्षा हेतु अपने अपने कार्य मे तन मन धन से लग गये। नथ्थू कौए ने बताया यहाँ से दस किलोमीटर दूर शहर मेंं एक नर्सरी है अर्थात पेड़ पौधों की दुकान हैं वहाँ से हमें बीज व पौधे आराम से उपलब्ध हो जायेगे,हम आज रात्रि को वहां से पौधें चुरायेंगे, काली कोयल व सबसे चतुर ढोलकी लोमड़ी दिन में शहर जाकर उसका जायजा लेंगे,उसके बाद लट्टू खरगोश हमारे प्लान को अंजाम देगा। ऐसा ही हुआ काली कोयल व लोमड़ी ने अपना कार्य पूरा किया और रात्रि में सभी की देख रेख मेंं लट्टू खरगोश बहुत सारे पौधे व  बीज नर्सरी के पहरेदार से आँखे बचाकर ले आया किंतु इसी बीच तारों की बाऊंट्री से कूदते वक्त उसे थोड़ी खरोच आ गई जिससे वह कराह उठा व जैसे तैसे पौधे व बीज लेकर जंगल पहुँचा, हाथी दादा ने जाते ही नट्टू खरगोश के हाल चाल पूछे व जंगल के डॉक्टर भालू काका को बुलाया,उन्होंने ने घाव की मरहम पट्टी कर दी व कुछ गोलियाँ लिख दी जिन्हें समय समय पर लेने को कहा। घाव ज्यादा बड़ा नहीं था इसलिए दो तीन दिन में भर गया तब जाकर जंगल के समस्त जानवरों व हाथी दादा और शेरु मुखिया ने चैन की साँस ली। अगले दिन नथ्थू कौआ सबको अपनी अगली योजना बता ही रहा था की, काली कोयल व सबसे चतुर लोमड़ी ढोलकी ने आकर बताया  की शहर से कुछ अफसर अपने संग कुछ मजदूर लेकर आये हैं जो पेड़ों को काटने की योजना बना रहें है जल्दी करो। नथ्थू ने सबको अपनी योजना समझाई व जंगल में भूत होने की अफवाह फैलाने को कहा व भूत का रोल डॉक्टर भालू को दिया गया, जैसे ही मजदूर पेड़ काटने लगे भूत बने डॉ भालू चिल्लाये में भूत हूँ जंगल के जानवर भी भागने का नाटक करने लगे मजदूरों व अफसरों को लगा वाकई जंगल में भूत है और सबसे चतुर लोमड़ी ढोलकी तो सचमुच बेहोश हो गई जिससे तो वे इसे सच मान बैठे और जंगल से नो दो ग्यारह हो गये व जंगल मेंं कारखाना खोलने का सपना देखना छोड़ दिया। गाँव का मुखिया शेरु नथ्थू की योजना व ढोलकी लोमड़ी की एक्टिंग से बहुत प्रसन्न हुआ व उनको शाबाशी दी। नथ्थू कौए ने अधूरी पड़ी अपनी योजना को फिर सबके सामने रखा तथा खेत में बीज व पौधे अच्छी तरह पनप पाये इसलिए तुलसी व हुलसी हिरणी को जंगल की जुताई का काम सोपा, जो दोनों ने बखूबी किया व  लट्टू खरगोश ने सड़ी गली घास फूस व गोबर डालकर जंगल की बंजर भूमि को फिर से उपजाऊ बना दिया,काली कोयल ने उपर से बीज गिराने का कार्य किया हाथी दादा ने पौधे लगाने का और समस्त जंगलवासियों ने बीजों व पौधों को पानी देनें का। जल्द ही सबकी मेहनत रंग लाई पूरा जंगल हरे हरे पेड़ों से लद गया मीठे मीठे फल पेड़ों पर आने लगे जंगल के समस्त जानवर व पशु पक्षी पेड़ों की घनी छाया व फलों का लुफ्त उठाने लगे। जंगल के मुखिया ने जंगल में एक सम्मान समारोह आयोजित किया उसमें समिति के समस्त लोगों को सम्मानित किया गया ये जंगल के इतिहास में पहली बार हुआ था जब सभी लोगों ने मिलकर जंगल बचाया था। आज सोनू खरगोश बहुत खुश था क्योंकि उसके विश्वास व कुछ करने की भावना ने आज जंगल को बचाया था। जंगल को छोड़कर जाने वाला भी जंगल लौट आया था। इतने मेंं ही सोनू के बेटे चिंटू ने आवाज दी पापा घूमने नहीं चलना हैं क्या इतना कहना था की सोनू अपने बेटे चिंटू के साथ चल पड़ा।

 

शिक्षा:-छोटी सी पहल भी बड़ी बड़ी परेशानियों का हल हो सकती है।

 

कवि अजय जयहरि कीर्तिप्रद

 

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