#Kahani by Anantram Chaubey

वेरोजगार युवक । कहानी ।

देश में दिनो दिन बढती मंहगाई वेरोजगारी से देश की जनता वेरोजगार मिडिल गरीब ब्राह्मण वर्ग के पढे लिखे युवा वर्ग बहुत परेशान है माता पिता बच्चो की पढाई मे घर जमीन भी बेच देते है पढ लिख कर बच्चो को नौकरी नही मिलती है क्या करे क्या न करे ? सरकारे नौकरी बालो की रिटायरमेंट की उम्र बढाते जाते है इससे वेरोजगारी और बढती जाती है ।खासकर उच्च वर्ग के युवाओ को तो नौकरी मिलती ही नही है ।ऐसे ही एक ब्राह्मण वेरोजगार युवक एम एस सी प्रथम श्रेणी में पास होने के बाद अब वेरोजगारी से परेशान नौकरी के लिये दो तीन वर्षो से भटक रहा था ब्राह्मण युवक ज्ञान बुद्धि में तेज था अचानक मन में एक युक्ति आई और रोज शमशान घाट मे जाकर एक दो शव यात्राओ में शामिल होने लगा । आजकल शव यात्रा में जो भी शामिल होता है सभी को एक किताब में नाम पता लिखने को कहा जाता है सभी शामिल लोग उसमे नाम पता लिखते है ।वेरोजगार युवक भी अपना नाम व पता में शमशान घाट के पहले झोपड़पटी लिखता है । युवक रोज रोज शव यात्राओ में शामिल होने लगा । दस वारह दिन वाद एक जजमान युवक की झोपड़ी में आये और युवक को तेरहवीं का आमत्रण देकर गये । दूसरे दिन युवक शव यात्राओ में शामिल होने के वाद नहा धोकर तैयार होकर जजमान के घर तेरहवीं के आमत्रण में गया । वहाँ भोजन करने के वाद एक गिलास तोलिया 101 रूपया दक्षिणा में भी मिला । पेटभर खाना और 101/ रूपया पाक वेरोजगार बहुत खुश हुआ और अपने निवास पर आ गया । यह क्रम प्रति दिन चलने लगा । सुबह शव यात्राओ मे शामिल होने लगा दोपहर में नहाने धोने के बाद तेरहवी के आमंत्रण में जाने लगा प्रतिदिन तेरहवीं के आमंत्रण मिलने लगे ।वेरोजगार युवक को प्रतिदिन पेटभर खाना और खर्च को रुपया भी मिलने लगे । एक दिन एक जजमान आमंत्रण कार्ड देने आये युवक ने उनको झोपड़ी में बैठकर समझाया आपके यहाँ खाना खाने आऊगा खाना भी खाऊगा मगर ये दान सामग्री जो मिलती है उसकी जगह नगद राशि दे दिया करे वेरोजगार हूँ रुपया पैसा मिलेगा तो मैं उस पैसो से अपने वृद्ध माता पिता तलाक शुदा बहन दस वर्ष की भांजी का भरण पोषण कर पाऊगा । जजमान को युवक की बात पसंद आई और युवक की बातो से सहमत हो गये । युवक जब जजमान के घर घर गया पेट भर खाना खाने के वाद दक्षिणा में उसको 501 रुपया नगद भी मिला । अब प्रतिदिन कही सौ कही दो सौ कही पाँच सौ रुपया व पेट भर खाने को मिलने लगा । अब तो युवक ने अपने दो चार वेरोजगार ब्राह्मण युवको को इस कार्य में शामिल कर लिया ।
इस तरह वेरोजगार युवक को काम भी मिल गया माता पिता का पालन पोषण करने लगा ब्राह्मण होने का धर्म निभाने लगा घर परिवार समाज में सम्मान भी मिलने लगा । और समाज सेवा भी करने लगा ।
अनन्तराम चौबे
अनन्त
जबलपुर म प्र

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