#Kahani by Anantram Chaubey

लग गई

यदि घर मे आकर कोई पढा लिखा वेरोजगार बेटा माँ से कहे
मम्मी मम्मी लग गई मां क्या कोई भी सुनेगा
यही सोचेगा कही चोट मोट लग गई होगी
सभी के मन में दुख होता है पूरा माहोल में दर्द हताशा निराशा करूणा
दया ममता के भाव उत्पन्न हो जाते है भीड़ में इकट्ठे सभी दुखी होते है सभी चोट को देखने बैचेन नजर आते है पूरा माहोल शोकाकुल हो जाता है सोच में
नकारात्मकता आ जाती है फिर अचानक सच्चाई पता
लगती है कही चोट नही लगती है बेटे की
नौकरी लग जाती है सोच सभी के मन की
बदल जाती है सभी खुश हो जाते है खुुशियाँ
मनाते है बेटे को गले लगाते है मिठाईयाँ
बांटते है यहां मन मे सकारात्मक सोच आ
जाती है सोच तो बस मन की होती है खुशियो
का माहोल बन जाता है ।सभी खुश हो जाते है खुशियाँ मनाते है । बेटे की नौकरी जो लग जाती है माँ की खुशियो का ठिकाना नही रहता है ।

अनन्तराम चौबे

Leave a Reply

Your email address will not be published.