#Kahani by Archana Kochar

लघु कथा

 

निरूत्तर

 

बच्चों के रोने, पापा मम्मी को मत मारिए-मत मारिए तथा    शर्मा जी की जोर-जोर से चिल्लाने की आवाजें साथ वाले घर से आना आम बात हैं। आज दोपहर में पड़ोसन सरोज से सामना हो गया। रो-रो कर उसका बुरा हाल था। शरीर में जगह-जगह पर चोटों के निशान थे। मुझसे रूका नहीं गया और कह बैठी, आजकल तो औरतें के साथ घरेलू हिंसा  के पक्ष में अनेको प्रावधान हैं। आप कानून से मदद क्यों नहीं लेती हो। वो तपाक से बोली ऐसी कोई बात नहीं है। बस इनका गुस्से पर नियंत्रण नहीं रहता। गुस्सा शांत होते ही बहुत प्यार करते है। जख्मों पर मरहम लगाते है तथा दवा-दारु करवाते है। हमारे यहाँ तो मायके से डोली उठती है और ससुराल से अर्थी। इतना कहकर वो मुझे निरूत्तर कर चल दी।  – अर्चना कोचर

 

 

 

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