#Kahani By Archana Kochara Sugandha

बेरंग

सुबह- सुबह सैर पर जाते हुए सफेद धोती में लिपटी अम्मा से सामना हो गया। वो अपने.आप से बातें कर रही थी तथा दोनों हाथों की मुट्ठियों में बार.बार कुछ समेटती तथा उन्हें खोल कर हवा में हाथ लहरा कर आसमान की तरफ छोड़ देती। सैर से वापस आकर देखा तो उसका वहीं क्रम जारी था। हम से रूका नहीं गया और पूछ बैठे अम्मा क्या कर रहीं हो, वो बोली इस दुनिया से सारे रंग समेट कर वापस आसमाँ में भेज रहीं हूँ। आप ऐसा क्यों कर रहीं है इससे तो यह संसार बेरंग हो जाएगा। चेतना से भरा मानव, अवचेतना में खो गया हैं। अपने कृत्यों से रंगों की खूबसूरती को नष्ट करके स्वयं ही उन्हें बेरंग कर रहा हैं। हमने हैरानी से उसकी तरफ देखा तो वो बोली प्रकृति का विनाश, प्राकृतिक सम्पदा का दोहन, प्रदूषण, भ्रष्टाचार, झूठ.फरेब, ईर्ष्या.द्वेष और पल-पल रंग बदलती दुनिया ने तमाम खूबसूरत रंगों को रंगहीन कर दिया हैं। इसलिए इन्हें इनके देवी.देवताओं के पास वापस भिजवा रहीं हूँ। कम से कम उनके पास यह सुरक्षित तो रहेंगे। हम अपने स्वार्थ के आगे इतने विवश थे कि चाह कर भी कुछ नहीं कर सकें। मूक दर्शक बने प्रकृति के मधुर-मनोहर रंगों को इस तरह सिमट कर आसमाँ में जाते देखते रहें।

अर्चना कोचर
277 सुभाष नगर
रोहतक124001हरियाणाफोन 7206140615

Leave a Reply

Your email address will not be published.