#Kahani by Avanindra Singh Bismil

शीर्षक-चाय सी मोहब्बत।।

 

वो हर दिन मुझे दिख जाती चाय के स्टाल के सामने वाले बस स्टैंड पर खड़ी बस का इंतजार करती हुई।

मैं रोज चाय पीते-2 उसे देखा करता था।वो आकर्षक नहीं थी और उसकी इसी बात ने ही मुझे उसकी तरफ खींचा था।वो भी कभी-2 मेरी तरफ देख लेती थी अब मैं भी कोई फिल्मी हीरो तो था नहीं कि हर दूसरी लड़की मुझे देखे तो देखती ही रह जाये पर जब कभी एक आध बार हमारी नजरे मिली उसने मुझमे कुछ तलाशने की कोशिश की और मैने उसमें।

     घर से बाहर रहने का एक नुकसान ये भी है कि आपको या तो खाना बनाना पड़ता है या बाहर खाना पड़ता है।अब मैं इतना धैर्यवान तो था नहीं कि खाना खुद बनाऊँ।तो जब से काम के सिलसिले में मैं आगरा आया तभी से बाहर ही चाय और खाना होता रहा है।मैं जब भी सुबह चाय पीने स्टाल पर जाता वो मुझे दिख जाती थी।अब मुझे उसका इंतजार रहने लगा था।जब वो नहीं आती या देर से आती तो मुझे बेचैनी होने लगती।

     मैं अक्सर उससे बात करने के नये बहाने ढूँढा करता और एक दिन किस्मत से वो मुझे मिल गया।हुआ यूँ कि जैसे ही चाय के स्टाल पर पहुँचकर चाय माँगी कुछ देर बाद वो भी आयी और उसने भी चाय माँगी और चाय पीकर जब पैसे देने लगी तो उसका एक नोट उसके पर्स से नीचे गिर गया।मैने जल्दी जल्दी चाय खत्म की नोट उठाया और उसके पीछे भागा,”एक मिनट सुनिये ओ मैडम” मैने कहा।”मेरा नाम नेहा है मैडम नहीं।”वो बोली।”ये आपके रुपये वहाँ गिर गये थे,वैसे मैं राजीव।”ये हमारी पहली मुलाकात की पहली बातें थी।फिर हम हर रोज मिलने लगे उसी चाय के स्टाल पर।हम चाय पीते,बातें करते और तब तक उसकी बस आ जाती।उसने बताया था कि वो आगरा के पास एक प्राइमरी स्कूल में टीचर है,उसने अभी तक मेरे बारे में कुछ भी नहीं पूँछा था।

  एक दिन हमने साथ में खाने का प्लान बनाया।हम एक होटल पहुंचे और खाना आर्डर किया।”और तुम क्या करते हो,तुमने कभी बताया नहीं।उसने पूँछा।”मैं गाईड हूँ,आगरा आने वाले टूरिस्ट को यहाँ की ऐतिहासिक इमारतों के बारे में बताता हूँ।”मैने कहा।”क्यों तुमने पढ़ाई लिखाई नहीं की क्या बिल्कुल”उसने हँसते हुए कहा।”पढ़ाई तो एम.एस.सी तक की है पर नौकरी वाला रूटीन मुझे पसंद नहीं है।वही रोज आफिस वही शाम को घर मेरे बस का नहीं है।मैने कहा।”पर जिंदगी में सेटल भी होना होता है कुछ करना भी तो होता है क्या पूरी जिंदगी गाईड बन कर गुजार दोगे।”वो बोली।”मेरा ऐसा स्वभाव ही नहीं है कि पूरी जिंदगी एक ही काम कर सकूँ।फिर कुछ सपने है अगर पूरे हुये तो अच्छा है नही तो चल रही है जिंदगी चलती रहेगी।मेरा मानना है जिंदगी में सेटलमेंट ही सबसे बड़ा अनसेटलमेंट है।”मैने हँसते हुए कहा।वो कुछ कहने जा रही थी तब तक खाना आ गया।हमने खाते समय कोई बात नहीं की।मैने जब उसे बस स्टैंड छोड़ा तब भी वो बहुत चुप थी।वो अचानक बहुत शांत हो गई थी।

  ऐसे ही दिन बीतते जा रहे थे अब वो मुझे बहुत अच्छी लगने लगी थी शायद मुझे उससे मोहब्बत हो गयी थी।पर मैं उससे कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।और एक दिन वो आयी और उसने बताया कि उसकी शादी उसके घर वालों ने तय कर दी।लड़का बैंक में किसी ऊँची पोस्ट पर काम करता था।उसने जब मुझे ये बताया तो मुझे झटका लगा और शायद उसे ये बात पता चल गयी तभी उसने मुझे गले लगाया और मेरी आँखों को चूमते हुये कहा,”तुम्हारी आँखें मुझे बहुत पसंद है बहुत ईमानदार है बिल्कुल तुम्हारे तरह,ऐसे ही रहना और अपने सारे सपने पूरे करना।”ये कहकर वो चली गयी और मुझे दुःख के समंदर में डुबो दिया।

      इस घटना के साल बाद मेरा सपना पूरा हुआ।मेरा हमेशा से ये सपना था कि मेरा एक होटल हो जिसमें एक कार्नर किताबों का हो और हर शनिवार उसमें एक स्टोरीटेलर,एक पोएट बुलाया जाये जो वहाँ अपनी स्टोरी और कविता सुनायें।हालांकि इस सपने को पूरा करने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी और अपने आप को पूरी तरह बदलना पड़ा।अब मैं एक प्रोफेशनल बिजनेसमैन बन चुका था।शायद 7 साल पहले का मैं खुद अपने आप से अब मिलता तो खुद को ही पहचान न पाता।

         एक दिन शनिवार को हमेशा की तरह किसी आर्टिस्ट को बुलाया जाना था।मेरे मैनेजर ने मुझे बताया कि उसने जयपुर की एक मशहूर स्टोरीटेलर को बुलाया है जिन्होंने बहुत कम समय में बहुत नाम कमाया है।जब स्टोरीटेलर के आने का वक्त हुआ तो मैं बुके लेकर होटल के बाहर खड़ा हो गया और मुझे ये देखकर फिर झटका लगा कि जो स्टोरीटेलर मेरे सामने से आ रहा था वो और कोई नहीं नेहा थी।बहुत ज्यादा बदलाव तो नहीं आया था उसमें पर पहले से ज्यादा आकर्षक लग रही थी।उस दिन उसने जो भी कुछ सुनाया मेरा ध्यान उस पर गया ही नहीं,मैं केवल उसे देखता रहा और पुरानी यादों में खोया रहा।कार्यक्रम खत्म होने के बाद उसे हमारे होटल की परम्परा के अनुसार एक स्पेशल रूम में ठहराया गया।मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं उससे मिलूँ जाकर या नहीं।तब तक मैनेजर ने मुझसे कहा कि नेहा मुझसे मिलना चाहती है।मै जब उसके कमरे में पहुँचा तो उसने कहा,”मतलब होटल के मालिक बन गये हो आप तो छोटे लोगों से मिलेंगे भी नहीं,बात भी नहीं करेंगे।”अरे इतने दिनों बाद अचानक तुमको देखा समझ नहीं आ रहा कि क्या कहूँ,और कैसी हो।”वो हँसने लगी मैने सोंचा कि मैने ऐसा क्या कह दिया,”कितने फार्मल हो गये हो तुम,मैने कभी सोंचा नहीं था इतना बदल जाओगे तुम,बैठो तुम्हें सहेजने के लिए एक चीज मँगायी मैने,तुम्हारी झिझक एक मिनट में खत्म हो जायेगी।”थोड़ी देर बात दरवाजे पर दस्तक हुई और वेटर दो चाय के कप लेकर अंदर आया।”चाय पर खत्म हुयी बातें शायद चाय पर फिर से शुरु हो जाये”नेहा ने कहा।और सच में चाय पीते-2 सहज हो गया फिर हम लोगों ने दिल खोल के बातें की ।सात साल से दिल की डायरी जो खाली थी अचानक सात मिनट में ही भर गयी।उसने बताया कि उसने शादी नहीं की क्योंकि लड़के वालों ने दहेज की बहुत माँग की जिसकी वजह से उसके फादर को घर गिरवी रखना पड़ा।ये बात जब उसे पता चली तो उसने शादी से इंकार कर दिया।,”पर तुम स्टोरीटेलर कैसे बन गयी और इन सात सालों में न मुझसे मिलने की और न कान्टैक्ट करने की कोशिश की”मैने पूँछा।,”जहाँ तक रही बात तुमसे मिलने की हिम्मत नहीं थी मेरे अंदर क्योंकि जिस हालात में तुम्हें छोड़ कर गयी थी,दोबारा तुम्हें फेस करने की हिम्मत नहीं थी।शायद अब हिम्मत आ गयी क्योंकि तुमने अपने लिए इतना कुछ कर लिया है।और स्टोरीटेलिंग तो तुम्हारा ही असर है तुम बिल्कुल बहते पानी की तरह थे,मेरी अंदर की जमी मिट्टी को बहा ले गये।तुम जिंदगी को जिंदगी की तरह लेते थे बोझ की तरह नहीं।तुम्हारे ही असर से मैने धीरे-2 किताबें पढ़नी शुरू की और फिर लिखना शुरू किया और आज मैं यहाँ हूँ।पर मैने ये नहीं सोंचा था कि मुझे बिगाड़ कर तुम इतने सुधर जाओगे।”वो हँसते हुये बोली।मैं भी हँसने लगा।ऐसे ही बात करते-2 आधी रात हो गयी।मै उठकर जब अपने कमरे में जाने लगा तो उसने कहा,”तुमने शादी क्यों नही की”।,”क्योंकि कुछ साल पहले मुझे एक लड़की ने आँखें चूमकर वैसा ही बना रहने को और अपना सपना पूरा करने को कहा था।हालाँकि मैं बदल गया हूँ पर अपना सपना पूरा किया है और उसका भी।”उसकी आँखों में आँसू आ गये,”मेरा ख्याल रखोगे।”उसने कहा।,”अब भी तुम्हें शक है इस बात पर सात साल कम नहीं है इम्तिहान के लिए।”वो उठी और मुझे गले लगा लिया उसकी आँखों में आँसू थे जो मेरी आँखों में भी थे और दोनों के आँसुओ ने एक दूसरे के साथ रहने का फैसला कर लिया था।।

 

अवनीन्द्र बिस्मिल

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