#Kahani by Azhar Ali Imroz

.एक छोटी सी कहानी………………

 

दो मित्र था । जो गर्मी के दिनो में घर से बाहर थोड़ी दूर में एक पुला थी।

उस पुला पे रात 11 बेजे गया । दो मित्रों की बात थी। दो मित्र हंसिया थे। हंसी मजाक में लग गया ।

दुनियावी बातें होने लगी।

अचानक एक झरझराहट  की आवाज़ सुनाई दिया ।

इस आवाज को सुन कर आश्चर्य हुआ ।और दोनो मित्र भागने लगा।

एक लुंगी यानि (पतलून ) में था।एक मित्र employed man था जो paint short में ही था।

जो पैन्ट शर्ट में था ।वो बोला भाई भागो मत संकट का सामना करते चलो।

फिर दुबारा अपनी -अपनी स्थान को ग्रहण किया ? और समझाने लगा अपने मित्र को कोई अगर ऐसा हादसा हो तो भागनी नहीं चाहिए ।

बल्कि सब के साथ खुद को भी बचनी चाहिए ।

थोड़ी देर के लिये देखा जाये तो मैं तुझ से पहले अपनी जान का सुरक्षित चाहता ।क्योंकि मैं पैंट शर्ट में हूं।और तुम लुंगी में हो तुम इस दहशत देने वाली हादसा में -आ-सकते हो।

इतनी बात को खत्म होनी थी कि एक और भयानक सी आवाज सुनाई दिया ।और उस भयानक सी आवाज की कोई दिसा नहीं देखाई दे रहा था।

फिर दोनों मित्र धीमी गति से चल पड़ा ।क्योंकि एक समये में दो आवाज सुनाई दिया ।अब ये दो मित्र तीसरा आवाज़ सुनना नहीं चहा।इसलिए की वो समझता था। दिन इंसान के लिये है।रात जिन्नो  बसर के लिये है।

इस बात को समझते हूये। दोनों घर तक पहुंच गया ।

 

तो दोस्तो इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है।

संकट चाहे आपका हो या और किसी का।

संकट में पड़े आदमी को उनकी हलात तक नहीं छोड़नी चाहिए ।

ये घड़ी आपका भी हो सकता है।

 

प्रो०:——अज़्हर अली इमरोज़

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