#Kahani by Harprasad Pushpak

लघुकथा—तकनीक

अश्विन कई बार बचने के बाद भी आखिर एक दिन अधिकारी के चंगुल में फंस ही गया ।बचने के ऐ प्रयास करने के बाद भी उसे सफलता नही मिली क्योंकि

अधिकारी की छवि एक ईमानदार कड़क अधिकारी की थी ।अब उसने एक अन्तिम प्रया्स किया और अधिकारी के घरेलू नौकर को पांच सौ रूपये का प्रलोभन देते हुए पूछा -बुधिया ये बताओ तुम्हारे साहब के घर रोज इतनी

बड़ी बड़ी गाड़ियां क्यों आती हैं ? बुधिया ने मुसँकुराते हुए कहा अरे साब ये तो मैम साब के पास आती हैं ।अश्विन ने कहा क्यों ? मैम साब बड़े बड़े व्यापारियों के बीमा जो करती हैं ।ऐसा करने का सुझाव मैम साब को साब ने ही दिया था । तब से रोज गाड़ियों की लाईन लगी रहती है ।

बस! अश्विन समझ चुका था ईमानदार छवि  और निष्ठावान अधिका का चेहरा ।फंसने और न फंसने का राज ,और.फिर उसके बाद वह भी कभी नहीं फंसा ।

हरप्रसाद पुष्पक

रूद्रपुर(ऊधम सिंह नगर)

उत्तराखण्ड

मो.  9199277-21977

425 Total Views 6 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.