#Kahani by Manoj Karn

एन.आर.आइ बहू

— अरे ! चड्ढा साहेब, देश छोड़ने की तैय्यारी मे पार्टी है क्या ?

— नही पाजी ,आज बहू ब्याही जायेगी !

— यानी वो लड़की…..लिव इन रिलेशन वाली है ?

— बिल्कुल नही ! बहू तो है ही पर अधुरी !

— अधुरी ?

— आज मंगलसुत्र की रस्म अदायगी के बाद पुरी बहू हो जायेगी .

— तो पहले किस रस्म से पनाह ली थी आप के परिवार मे ?

–वहाँ की पाश्चात्य चलन ! अंगुठी रस्म से .

— ” ऐँ…..! हम औरतें बेबकुफ हैं क्या ? सभी उठ चलने लगी और समवेत  स्वर से – बिन ब्याही कुरी गाँव की बहू कहलायेगी या समाज की नाक कटबायेगी  ?”

— बुआ जी-‘ ये देखिये अंगुठी ! रस्म- रिवाज से ही पति, परिवार ने अपनाया है .

— चल ! बड़ी आयी अंगुठी चमकाने बाली.समाज का रस्म भी ते कोइ चीज है .

— आन्तरिक संबंध तो हो गए, अब फहराते रहें अपने रस्म का झंडा ! समाज के लिए

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