#Kahani by Pratik Palor

लघु कथा: पश्चाताप

बड़े दिनों के बाद अपनी बाइक पर मौज करने मानव निकल पड़ा अनन्या के साथ । शहर के बाहर पहाड़ी पर चढ़ कर डूबते सूरज को देखने का अनन्या का बड़ा मन था । गाते-गुनगुनाते अभी आधे रास्ते ही पहुँचे होंगे की एक घुमावदार मोड़ पर सामने से तेज़ आते ट्रक से बचते हुए मानव ने बाइक मोड़ी तो सन्तुलन खो बैठा और बाइक फिसल गई । ईश्वर की दया से दोनों के प्राणों की रक्षा तो हो गई, लेकिन घाव और खरोंचें काफी थे

चोट और रक्त प्रवाह के कारण कमज़ोरी से बदन में कम्पन्न होने लगा और बुखार भी आ रहा था । साथ लाये पानी की बोतल छिटक कर गिरी, लेकिन संयोगवश मिल गई और किसी तरह पानी के सहारे बेहोशी से बचाव हुआ । अनन्या को छाँव में बिठा कर मानव कोशिश कर रहा था की कोई गाड़ी रुक कर उनकी मदद कर देती । धूप, परेशानी और चिन्ता के कारण खड़े रहना भी मुश्किल हो रहा था । लाख कोशिश के बावजूद कोई भी रुक कर उनकी मदद करने को राज़ी नहीं था । कुछ की आँखों में जल्दी थी, तो कुछ के दिमाग में अनजाना भय और बाकी पूरी तरह सम्वेदनहीन थे ।

करीब एक घण्टे बाद एम्बुलेंस से संपर्क हो पाया और उसे आते-आते आधा घण्टा और लग गया । अस्पताल के लिए रवाना होते ही मानव फफक-फफक कर रोने लगा । अनन्या उसका कान्धा सहलाते हुए बोली “घबराओ नहीं मानव, सब ठीक हो जाएगा”

मानव सुबकते हुए बोला “सब मेरी गलती थी अनन्या, मुझे माफ़ कर दो”

अनन्या समझाने लगी “तुम्हारी कोई गलती नहीं है मानव, दुर्घटना तो किसी के भी साथ हो सकती है”

मानव बहुत पीड़ा के साथ फिर बोला “दुर्घटना नहीं अपराध कहो । और गलती आज नहीं है, गलती तो उस दिन थी जब तुम्हारे बार-बार कहने के बावजूद मैंने सड़क पर पड़े उस घायल की मदद के लिए गाडी नहीं रोकी थी । और तुमने कहा था की मेरा नाम ही गलत है । आज मुझे एहसास हो रहा है की मैं कितना गलत था”

अनन्या मानव का मन भाँप गई । उसकी भी आँखों में करुणा और ख़ुशी के मिले-जुले भावों के साथ आँसू भर आए । मानव का हाथ थाम कर बोली “तुम्हारे पश्चाताप ने सारा मैल धो दिया, मानव । मैं अपने शब्द वापस लेती हूँ”

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