#Kahani by Vishal Narayan

-” मुहब्बत तो नहीं “–

ओए हीरो, क्या बात है. सुबह से साफ सफाई चल रही है. धोए हुए कपड़े भी धो डाले. पूरा घर चमकाए जा रहे हो. दीवाली आने वाली है क्या. और मुझे तो नहीं लगता कभी गलती से भी जनवरी में दिवाली आई हो. और ये ऊंची आवाज में भजन कौन सून रहा है. कल तक तो मेरे रस्के कमर … मजा आ गया फुल वोल्युम में बज रहा था. और आज कहीं फोन भी नहीं दिख रहा तुम्हारा दिन भर तो चिपके रहते थे उससे.

हैल्लो तुमसे ही बात कर रहा हूं. क्या कर रहे हो खुद से भागने की कोशिश. शौक से करो और शायद खुद से बच भी जाओ पर क्या मुझसे छुपा पाओगे. उसकी शादी तय हो रही है बस इतनी सी बात से टूट गए.

तुम्हें अपना बेस्ट फ्रेंड मानती है. सिर्फ तुम्हारे लिए रात रात भर जागती है. जैसे ही फुर्सत मिलता है काल करती है तुम्हें. इसका मतलब ये तो नहीं न. और अपने शादी की बात बताने में उसे तो जरा सी भी हिचक नहीं हुई. और तुम हो की, मरे जा रहे हो. कितने प्यार से बताया था उसने लड़का सीए है रीच फैमिली से है और तुम एक बंधी बंधायी पगार पाते हो. और उससे भी बड़ी बात तुम उससे मुहब्बत भी तो नहीं करते.

वो जब जब उदास हुई है हिम्मत बंधाया है तुमने. वो तो अपनी फोटो तक नहीं लेती थी. वो सुन्दर है ये अहसास भी तुमने ही कराया है. उसकी मुस्कान बहुत प्यारी है ये बताने वाले भी सिर्फ और सिर्फ तुम हो. तो क्या जब वो अपना घर परिवार छोड़कर जा रही है तब उसका साथ नहीं दोगे.

दीपक बनने का बहुत शौक रहा है न तुमको. खुद जलकर औरों को खुशी देना चाहते थे न. तो एक बार और सही. बहादुर हो यार. उठो. उसके नवजीवन की   शुभकामनाएं न दोगे. मुहब्बत न सही दोस्त के नाते हीं, उसे बधाई तो दे आओ.

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