#Kahani by Vishal Narayan

–” बेमतलब किरदार “–

कहानी में कुछ किरदार बेमतलब, बिला वजह ही आ जाते हैं. ना तो उनकी जरुरत होती है और ना ही कोई महत्वपूर्ण कार्य कि जिसको अंजाम न दो तो कहानी रुक जाएगी. फिर भी ये आते हैं. मुस्कुराते हैं. अपना सबकुछ लगा देते हैं और आपको हंसाते भी हैं. और फिर….

फिर क्या, कुछ भी नहीं. समाज की यही रीति रही है, वक्त की यही नीति रही है. जिस पात्र का कार्य प्रमुख नहीं होता, भूला दिया जाता है उसे. भूलना क्या, कोई पूछता तक नहीं. जिसने मुस्कुराने की इतनी वजहें दी है. आपको हंसने पर मजबुर कर दिया. क्या वो भी कभी रोता है. और रोता भी होगा तो फर्क किसे पड़ता है. आपको भी नहीं और मुझे तो बिल्कुल भी नही.

ये बात तो सदियों से मालुम है. गीता में भी लिखा है. कर्म करो और फल की इच्छा भूल जाओ. तो गीता के इस ब्रह्म वाक्य को समझ लिया इस मामूली से किरदार ने. वो आता है, हंसाता है और फिर चला जाता है. वह बदले में कभी यह चाह नहीं रखता कि कोई उसे भी हंसाएगा. उसके अंधेरों को भी कोई रौशनी दे जाएगा. पर आपकी तरह, मेरी तरह वो भी इक इंसान हीं तो है. उसके भी चेहरे पर उदासी आती होगी. उसे भी अकेलापन सालता होगा. उसके अंदर भी एक हुक सी उठती होगी. और जिसने औरों की उदासीयों को मुस्कान में बदला हो. जिसने औरों का अकेलापन बांटा हो. वो खुद को अकेला पाता होगा तो उसपर क्या बीतती होगी. कभी फुर्सत से सोचिएगा. पर आपको मतलब की एक बात बताउं. जब ये मामूली सा किरदार ऐसी किसी स्थिति में आता है तब वो खुद ही हंस पड़ता है अपने आप पर. ऐसी बातों का भी कोई मतलब बनता है क्या. और वो खुद ही बोल पड़ता है ‘बेमतलब किरदार’.

✍–” विशाल नारायण “

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