#Kahani by Ishq Sharma

लघु कथा •••भ्रूण हत्या

 

मेरे क्लासमेट जतिन से मेरी शादी हुई। उसके घर में उसकी माँ, पापा ही रहते थे। रिश्तेदार और भी थे लेकिन, सभी अलग-अलग रहते थे। मैं खुश थी। मुझ अनाथ को सहारा जो मिल गया था। और अच्छी बात तो ये थी, की जतिन के माँ-बाप ने मुझे कभी अनाथ महसूस होने ही नही दिया। जतिन प्राइवेट स्पोर्ट्स क्लब में टीचर थे। शादी के 6माह बीत चुके थे। जतिन की जॉब उनके व्यवहार के कारण अचानक छूट गई। दूसरी नौकरी मिली पर वेतन कम था। इस दौरान जतिन को काफी स्ट्रेस मिल चुका था। मैंने उससे थोड़ा वक़्त मेरे साथ गुजारने को कहा। छुट्टी वाले दिन, जतिन ने मुझे रेस्टोरेंट लेकर गए। खाना हमने ऑर्डर कर दिया था। खाना खाने के दौरान मुझे जोर जोर से उल्टियां होने लगी। आननफानन में जतिन मुझे पास के अस्पताल ले गए। तब वहाँ खुशखबरी मिली। कि हम माँ-बाप बनने वाले हैं। जतिन खुश भी थे और नाखुश भी। घर के लोन का बोझ, और रोजमर्रा की दौड़ से वो पहले ही परेशान थे। जतिन ने मुझे अस्पताल से घर लाते वक़्त कहा, हम कल मेरे मित्र की क्लिनिक चलेंगे। और चूमकी तुमसे रिक्वेस्ट है, अभी ये बात किसी से न कहना। अभी मेरी आर्थिक स्थिति भी ठीक नही और मानसिक तनाव बहुत है। जतिन का मायूस चेहरे की उदासी मुझे रास न आयी। मैंने हामी भरी। हम घर पहुंचे। जतिन ने मुझे मेन गेट पर छोड़ा और दवा लेके आता हूँ कहके निकल गए। मैं घर पर जा कर अपनी खुशियों को पिरोने लगी थी। मुझे बच्चों से बहुत लगाव था। घर में अपने श्रृंगार के सामानों को छूकर खुशी दुगुनी होने लगी थी। ऐसा लग रहा था मानो ये खुशी बहुत जल्द मेरे लब चूमने वाली है। इतने में जतिन दवा लेकर आ चुके थे। उन्होंने घर में माँ-पापा के साथ खाना खाया। और चुपके से दवा कमरे में ले आये। मुझे दवा खाने की विधि बताई। मैं दवा का सेवन कर सो गई। सुबह जतिन ने मुझे क्लिनिक चलने को कहा। हम गए। और उस क्लिनिक में उनके दोस्त से मुलाकात हुई। स्कैनिंग मशीन से उन्होंने गर्भ की जाँच करने वाली बात कही। मैं अंजान थी। मुझे नही पता था कि वो क्या कर रहे है। जतिन ने भ्रूण लिंग परीक्षण कराया। उन्हें लगा कि आने वाली संतान लड़की है। स्कैनिंग करने के बाद जतिन मुझे घर ले आये। और कहा कि डॉक्टर ने दवा बदलने को कहा है। जतिन मुझे दूसरी दवा लाकर दिए। मैं सेवन करने लगी।

3महीने गुज़र चुके थे। लेकिन अब वो एहसास नही हो रहा था जो एक गर्भवती महिला को होना चाहिये। मैं जतिन से कहती रही। एकबार डॉक्टर के पास चलते है। जतिन मुझे टालते रहे। मुझे शारिरिक कमजोरी होने लगी थी। और अपच की शिकायत रहने लगी थी। पेट की समस्याओं ने मेरा जीना मुहाल कर दिया था। शाम के वक़्त चौपाटी पे गुपचुप खाने के लिए अपनी सास के साथ निकली, गुपचुप खाकर वापस आते वक़्त मुझे चक्कर आने लगे और मैं वहीं गिर पड़ी। और सासु माँ सकते में आकर, चिल्लाने लगी। एकाएक भीड़ इकट्ठी हो गई। और मुझे पास के अस्पताल लाया गया। जतिन की माँ जी ने जतिन को फोन करके बुलाया। जतिन को आने में थोड़ा वक़्त लगेगा कह रहा था। जतिन के पापा जी ने ऑटो रिक्शा बुलाया। और मैं अपने सास ससुर के साथ (जतिन के माँ बाप के साथ) अस्पताल पहुँच गई। अस्पताल में आईसीयु में मुझे ले जाया गया।  जतिन भी अस्पताल पहुंच चुके थे। डॉक्टरों ने जतिन के माँ-बाबूजी के सामने मेरे (चूमकी के) गर्भवती होने की बात कही। लेकिन साथ में यह भी कहा कि किसी हानिकारक दवा के कारण उनकी हालत बिल्कुल ठीक नही। हम कोशिश में है। धैर्य रखिये। कुछ देर बाद डॉक्टरों ने आकर कहा।

आई एम सॉरी, दवा के सेवन के कारण आपकी पत्नी अब कभी माँ नही बन सकती। मेरे होश में आते ही जतिन माँ, बाप के साथ अंदर आया। जतिन के माँ-बाप का गुस्सा यह था कि तुम्हें बच्चा नही देना था तो शादी ही क्यों करी। ऐसी इज्जत रखी मेरे परिवार की। क्या जरूरत पड़ गई थी ऐसी दवा खाने की।  मैं खून के आँसू रो रही थी। गुस्सा सातवें आसमान पर था। और मैंने वहीं जतिन से कहा, हो गए खुश। यही चाहते थे न तुम। मैंने माँ बाबूजी से कहा। पूछिए अपने लाड़ले से। क्या किया उसने मेरे साथ।

जतिन अपने माँ-बाबूजी के साथ डॉक्टर से मिलने बाहर निकला और इतने ही देर में चूमकी अपने बिस्तर से उतर कर खिड़की के पास खड़ी खड़ी जोर जोर से रोने लगी। और खिड़की से कूदकर आत्महत्या कर ली।

 

लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या एकसमान अपराध है, अपने स्वार्थ या किसी अन्य समस्याओं के कारण भी कभी भी ऐसा कदम नही उठाना चाहिये।

आत्महत्या, किसी समस्या का समाधान नही होता। मनुष्य होना हमारा सौभाग्य है।

नोट:- उपरोक्त घटना और नाम सभी काल्पनिक है, कही कुछ मेलजोल केवल एकमात्र संयोग होगा।

  • ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

© इश्क़शर्माप्यारसे✍📲9827237387

  • ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

Leave a Reply

Your email address will not be published.