#Kahani by L R Seju Thob

कहानी *शक*

 

जब से सुभाष से मिली थी तब से एक अजीब सी स्फूर्ति का सचरण हुआ है उसे बार बार मिलने को मन कर रहा है कभी बाहर जाने को मन ही नहीं करता था अब तो थोडा बहाना मिलते ही चली जाती थी । चौड़ा सीना गोल चेहरा , गेहुए वर्ण का  हष्ट पुष्ट नौजवान सुभाष प्राइवेट कंपनी में काम करता है ।

उनसे बातो और मुलाकातो में न जाने कब प्यार हुआ पता ही नहीं चला । रोज मिलना , घंटो भर फ़ोन पर बाते करना तो हमारी आदत सी पड़ गयी । अब तो उनसे दूर जाना तो बिन पानी की मछली की जैसा था ।

उस दिन तो जनाब तो हद तो हद ही कर दी दरअसल कड़ाके की ठण्ड की वजह से मुझे तेज बुखार आ गया । मेरा सर दर्द से फटा जा रहा था तभी रात्रि में उनका कॉल आया तो मैने  कहा मेरी तबियत ठीक नहीं है । बस इतना ही बोल पाई दर्द के मारे रोना आ रहा था ।

थोड़ी ही देर सुभाष मेरे घर मेरे पास आकर बोला

क्या हुआ । सुभाष ने पूछा मेरी बहन ने कहा बुखार आ गया ।

:- चलो अस्पताल चलते है ऐसा कहते हुए सबके सामने मुझे अपनी बाँहो में उठाकर गाड़ी में बिठा कर ले गया ।

बेपनाह मोहब्बत पाकर ऐसा लगता की स्वर्ग इस धरती पर है। दिन तो इस तरह गुजर जाता था जैसे की एक क्षण और रात फ़ोन पर बातो करते करतें पता ही नहीं चलता की कब नींद आई और कब सवेरा हुआ ।

धीरे धीरे वक़्त गुजरता गया हमने लव मर्रिज का विकल्प चुना था पर

पता नही क्यों कुछ दिनों से उदास रहने लगा उनके स्व्भाव से चिड़चिड़ापन भी था एक दिन मेरे पास आकर बैठा तब मुझे शराब की बदबू आई

आज तुम शराब पीकर आये हो क्या ? मेने पूछा

:- नहीं । दो टुक में जबाब दिया ।

:- खाओ मेरी कसम मेने उनका हाथ मेरे सिर पर रखकर पूछा ।

:- हा पिया है क्या करोगी और तुम कितनो से बाते करती हो कितनो के फ़ोन आते है तुम्हारे पास….गुस्से से बोला ।

सुनकर दंग रह गयी । पैरो तले जमीन खिसक गयी ।

नहीं सुभाष ये झूठ है तेरे सिवाय किसी से बात नहीं करती …जो फ़ोन आते है वो मेरे अपनों के है ।

:- झूट बोलती हो तुम…. गुस्से में चिल्लाते हुए कहा ।

अंब समझ में आया की पिछले कुछ दिनों से उदास क्यों था? बहुत समझाया उसे पर नहीं माना दरअसल में उनके दिमाग में शक घर कर गया था जबकि की सच ये था की मै उनसे बेपनाह मोहब्बत करता थी ।

पर कहते शक की कोई दवाई नही होती और इसी वजह से रोज रोज झगडे होने लगे । उनकी बातो कभी प्यार तो कभी नफरत थी । उनका शराब पीकर रेलवे स्टेसन व बस अड्डे पर धमाल करना आम था “तुम सिर्फ मेरी हो कीसी और की नही हो सकती ” यहाँ तक मेरे घर के सामने शराब कइ नशे में धुत होकर अनाप सनाप बकता गया पुरे मोहले वाले इकठ्ठे हो जाते । बहुत बदनाम हो गयी ।

अब उनसे मिलने से भी डर लगने लगाफिर भी एक उनसे मिलने गयी । हमेशा की तरह आज उसने मोबाईल चेक नही किया ।

कैसी हो उसने धीरे से पूछा

:- तुम ये सब कयो कर रहे हो मुझे बदनाम करने पर तूले हुऐ हो मैने पूछा

:- तुम सिर्फ मेरी हो …..किसी और की नही हो सकती ।

;- आज से मर गय मै तुम्हारे लीये ये आखरी मुलाकात है आज से मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना । ऐसा कहते हुए में वहा से चल दी ।

आज काफी दिन हो गए उनका फ़ोन या मेसेज नहीं आया पर अचानक एक दिन उनका मेसैज आया

….कहा हो जानू आपकी बहुत याद आ रही  है मिलोगी क्या ? प्लीज….।

पढ़कर हैरान होगयी ये बदल क्यों गया .

यही सोचते सोचते  शाम 6 बजे गए तभी एक युवक तेजी से भीतर प्रवेश किया मै डर के मारे काँपते हुए पैरो से जैसे ही खड़ी हुई उसने ताबड़तोड़ चाकू से वॉर कर उतनी ही तेज़ी से भाग निकला । ब..बचाओ….बचाओ..

घाव पर हाथ रखकर जैसे तैसे सीढ़ियों से निचे आती तब तक बेहोश गयी ।

मैं मौत से बच गयी पर मुझसे गलती कहा हुई ये समझ न पाई ।

आशा करता हु हमारी रचना आप जरूर प्रकाशित करे अगर कोई कमी रह गयी हो तो हमे बताने का जरूर कष्ट करे

जय हिन्द

लालाराम सेजु थोब (एल.आर.सेजु थोब)

दूरभाष +91735794020

व्हत्साप +919785704869

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