#Kahani by Lucky Nimesh

कत्ल नही होने दुगां

डबल बैड पर आडी तिरछी अवस्था में पडी वह लडकी दुनिया जहान से बेखबर सोयी पडी थी! काली जिन्स और लाल टॅाप मे वह बला की हसीन थी! बैड पर उल्टी पोजीसन मे उसका चेहरा चमक रहा था और बता रहा था कि वह बेहद हसीन थी ,बेहद खूबसूरत! एक हाथ उसका आधा बैड से लटक रहा था जिसकी वजह से उसके हाथ में पहना बेशकीमती ब्रेसलेट ,जो कि सोने का था , लटक रहा था! ब्रेसलेट काफी चौडा था और उस पर लिखा था अग्रेंजी में ‘R’ जो सामने वाले को बरबस ही अपनी तरफ आकर्षित करता था!

तभी बैड के पीछे खिडकी पर आहट हुई बहुत धीरे से !फिर शान्ति छा गई! लडकी पर कोई प्रतिक्रिया नही हुई वो अब भी बेखबर सी सोई हुई थी! कमरे में नाइट बल्ब की रोशनी छाई हुई थी! खिडकी पर पुन: कुछ सरसराहट हुई! खिडकी के शीशे के अन्दर से एक हाथ अन्दर आया और उसने खिडकी की चिटकनी धीरे से खोल दी! हल्की सी आवाज जरूर हुई मगर लडकी पर कोई असर नही वह अब भी ज्यो की त्यो सोई हुई थी!

खिडकी को खोलकर नकाबपोश धीरे से कमरे के अन्दर कूद गया और कुछ सैकिन्ड के लिये उसी अवस्था में रहा ! ओवरकोट पहने नकाबपोश सिर पर फैल्ट हैट पहने हुवे थाऔर अपना चहरा भी नकाब से ढक रखा था! कुल मिलाकर किसी भी तरह से कोई उसे पहचान नही सकता था! वह सर से पाव तक भीगा हुआ था ! पानी टपक कर फर्श पर बिखर रहा था! धीरे धीरे वह लडकी की तरफ बढने लगा! एक हाथ उसका ओवरकोट की जेब में था! वह लडकी के पास पहुचा ! जब उसका हाथ जेब से बाहर आया तो उसमे रिवाल्वर चमक रहा था! उसने लडकी का कधां पकडकर पलट दिया ! लडकी ने कुनमुनाकर आखे खोल दी और बस उसकी आँखे फटी की फटी रह गई! नीन्द पूरी तरह से उड चुकी थी आखिर रिवाल्वर उसी को घूर रही थी! सैकिन्ड के सौवे हिस्से उसके तमाम मसानो ने पसीना उगलना शुरु कर दिया! वह चीखना चाह रही थी मगर खौफ से वह चीख नही पा रही थी!

नकाबपोश बडे आराम से उसकी हालत का मजा ले रहा था! कहा उसने भी कुछ नही!

“कौ…न.. हो ..तुम..? “लडकी की लडखडाती आवाज बडी मुश्किल से मुहँ से निकली ! नकाबपोश ने फिर भी कुछ नही कहा!

“बताते कयों नही ? यहाँ कैसे आये ? मुझे क्यो मारना चाहते हो?” कया बिगाडा है मैने तुम्हारा? ” डर की वजह से थर थर काँपती उसने एक ही साँस में सारे सवाल पूछँ डाले ! मगर पटठे पर कोई असर नही कुछ नही बोला ! वह शायद बोलना ही नही चाहता था ! उसका रिवाल्वर वाला हाथ उठा ! ट्रिगर पर उगंलिया सख्त होने लगी! लडकी समझ गई कि अब वह मरने वाली है उसने बैड से छलागं लगाने कि कोशिश !

धायँ…

गोली लडकी की जिल वाली जगह जा लगी ! लडकी का लहुलुहान जिस्म नकाबपोश के आगे जा गिरा !

“न..ही….”

एक चीख राजन के मुहँ से निकली और वह बैड पर बैठा गहरी हहरी सासँ ले रहा था! सर्दी के मौसम में भी उसका शरीर पसीने से तर ब तर था! हैरत से उसकी आँखे फटी की फची रह गई! काफी देर तक वह उसी अवस्था में बैठा रहा! बहुत देर बाद उसे होश आया टैबल लैम्प की चटकनी आॅन की ,सुबह के चार बज रहे थे! गला सूखा हुआ था जैसे काटें उगे हो! सांसे धौकनी की तरह चल रही थी! उसने पानी पिया कुछ राहत सी हुई मगर दिमाग अब भी सुन्न था! कुछ समझ नही आ रहा था कि यह सपना है या हकीकत ! वो गहरी सोच में था फिर उसे रात भर नीन्द नही आई वह बस वैसे ही लेटा रहा!

*****

राजन सुबह का नाश्ता कर रहा था जब उसका मोबाईल बज उठा ! उसने स्क्रीन पर नजर ङाली ! चहरे पर मुस्कान छा गई दूसरी तरफ वीणा थी!  वीणा मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती थी ! उसके परिवार में केवल वो उसकी माँ शारदा और पापा दया शकंर ही थे! दयाशकंर की दिल्ली में छोटी सी कपडो की दुकान चलाते थे! कुल मिलाकर गुजारा हो जाता था! जबकि राजन यूपी से था और वह दिल्ली जामिया नगर थाने में इन्सपैक्टर के पद पर था! यहाँ वह अपने छोटे से फ्लैट में रहता था! बेहद इमानदार कर्मठ व तेजतरा्र पुलसिया था ! वीणा व राजन की मुलाकात वीणा के काॅलेज फक्संन में हुई थी और तभी से दोनो प्यार करने लगे थे! यह बात सभी को मालूम थी और किसी को एतराज भी नही था सो उनका मिलना जुलना आम बात थी! आज भी उनका लचं का प्रोग्राम था सो वीणा का फोन आ गया था!

“हैलो” राजन ने प्यार से कहा!

” कहाँ हो राजन” वीणा की मधुर आवाज उसके कानो में पडी!

” बस नाश्ता कर रहा हूँ तुम कैसी हो”

” ठीक हूँ तुम सुनाऔ”

” बढिया ” राजन ने उसे सपने के बारे में कुछ नही बताया क्योकि वीणा घबरा जाती !

” तो आज लचं के लिये आ रहे हो न?”

” हाँ बिल्कुल आउगां ,बताओ कहाँ आना है?”

:” वहीं तिलक रोड पर जो रैस्टोरेण्ट है महाराजा रैस्टोरैण्ट वहीं पर मिलते है ,ठीक एक बजे ”

” ठीक है फिलहाल मै थाने जा रहा हूँ ,मैं वहीं आ जाउगां ”

” ओके”

“ओके” कहकर राजन ने फोन डिस्कनेक्ट किया और नाश्ते मे बिजी हो गया!

****

नाश्ते के बाद राजन ने पुलिस जीप निकाली और जामिया नगर के अपने थाने की तरफ दौडा दी! राजन का दिमाग अब भी उसी सपने पर अटका हुआ था ! न जाने क्यो उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे सब कुछ उसके सामने हुआ हो! कई दिनो से वह जब भी सोता वही सपना बार बार उसकी आँखो में समा जाता ! हालाकिं वह जानता था कि सपने झूठे होते है मगर दिल था कि मानने को तैयार नही था! यही सब सोचते हुए वह थाने में पहुचँ गया! कमपाउण्ड में पहुचँ कर जीप पार्क की और अपने आॅ फिस की तरफ चल दिया ! थाने में वही रोजमर्रा का काम जारी था! वह अपने आॅ फिस में पहुचाँ और घण्टी बजा दी! तुरन्त एक हवलदार अन्दर आया और सैल्यूट करके खडा हो गया! राजन ने सैल्यूट का जवाब दिया और हवलदार से रवि को अन्दर भेजने को कहा और काॅफी के लिये भी! हवलदार चला गया ! राजन ने सिगरेट जलाकर उसी सपने पर विचार करने लगा!

तभी रवि अन्दर आया ” सर आपने बुलाया” रवि सैल्यूट देकर बोला ”

” हाँ बैठो”

रवि राजन से जूनियर था ! उसे ज्वाईन करे ज्यादा टाइम नही हुआ था  मगर वो ईमानदार  व कर्मठ था ! रवि और राजन की उम्र का कोई ज्यादा फासला नबीथा इसलिये वे दोस्तो की तरह रहते थे! रवि सामने कुर्सी पर बैठ गया तभी हवलदार काॅफी के मग रख गया और वापिस चला गया! राजन कुछ देर तक यु हीं सोचता रहा ! रवि देख रहा था कि सर आज कुछ परेशान लग रहे है! चिन्ता राजन के चेहरे पर साफ चमक रही थी जबकि आजकल कोई ऐसा केस नही था जो परेशान करता! जब काफी देर तक राजन कुछ नही बोला तो रवि को कबना पडा! ” सर क्या बात है आप परेशान लग रहे है” राजन जैसे नीन्द से जागा !

” काॅफी लो रवि “कहते हुवे खुद भी मग उठा लिया ! रवि ने भी ऐसा ही किया ! राजन ने रवि को सपने के बारे में बताया कि किस तरह वही सपना उसे बार बार आ रहा है और वह सपने की वजह से परेशान है! रवि ने सारी बात सुनी और मुस्कुराकर बोला,

” सर आप ख्वामख्वाह परेशान हो रहे है! सपने तो पता नही क्या क्या आते मगर इनका कोई मतलब नही होता”

३मै “जानता हू रवि मगर पता  मगर पता नही दिल नही मान रहा”

सर क्या आपने उस सपने लडकी को देखा है। रवि  पूछा है?नही,कभी नही।

“बस तो आप क्यो परेशान होते है? यह सब वहम है।आप रैस्ट कीजिए”

” हूं ,,,,,,,ठीक कह रहे हो शायद ज्यादा सोचने से उल्टे सीधे ख्वाब रहे है।”राजन ने कहा_”ठीक है,रवि मै एक आधा घंटे मे निकलुगा , संभाल लेना।वीणा के साथ लंच पर जाना है।”

“रवि वीणा और राजन के सम्बंध से वाकिफ था सो उसने कुछ नही कहा”।

“तुम जा सकते हो रवि।””

” जो सर सल्यूट देकर वहां से चला गया”।

“राजन भी सारी सोचो को झटक कर काम पर लग गया”।

साढे बारह बज चुके थे । राजन ने अपनी जीत निकाली और तिलक रोड पर डाल दी।तभी वीणा का फोन आ गया।उसने जीप की स्पीड कम करके फोन कान से लगा लिया।” हे! कहां हो राजन ?वीणा ने कहा

“बस पहुंचने वाला हूं।रास्ते में हूं”।

“ठीक है, आ जाओ  ।मैं इंतजार कर रही हूं।”

“और मोबाइल डिसकनेक्ट कर दिया। राजन रेस्टोरेंट पार्किग में जीप खडी करके अंदर गया।एक टेबल पर वीणा बैठी दिखाई दी । वो वही पर आ गया। लंच का ऑर्डर देकर वो अपलक वीणा को देखने लगा।वीणा शर्मा गयी।

“क्या देख रहे हो?”वीणा ने कहा

“कुछ नही तुम बहुत हसीन लग रही हो।

राजन ने प्यार से कहा तो वीणा शर्मा गयी।लंच करते हुए वीणा बोली-“राजन एक बात कहूं”

हां बोलो । राजन ने कहा।

4

” मुझे गुडगाँव जाना है मेरी सहेली की शादी है मै तुम्हे छोडकर जाना तो  नही चाहती थी मगर वो तो बहुत जिद कर रही है ” वीणा ने थोडी मायूसी से कहा

” कोई बात नही तीन दिन की ही तो बात है चली जाना मगर कोशिश करना जलदी आने की ” राजन ने प्यार से कहा

” हूं मै कोशिश करुगी ”

” फिर इधर उधर की बातो के बाद वीणा घर के लिए निकल गई और राजन थाने की तरफ निकल गया ।

☆ ☆ ☆ ☆ ☆

टेक्सी से जो लडकी उतरी वो यकीनन बला की खूबसूरत थी । किमती जिन्स और टाप मै वो वाकई किसी अमीर घराने की लग रही थी आखो पर चश्मै लगाये वो बेहद मोडर्न लग रही थी हैण्ड बैग उठाये कुछ दुर ही चली थी कि कोई उससे टकराया वह बाल बाल गिरते बची तब तक वो समझती उसका हैण्ड बैग गायब था वो चोर शायद इसलिए जान बुझकर टकराया था ।

” हैल्प हैल्प प्लीज हैल्पमी ” वो चिल्लाइ मगर चोर गायब हो चुका था । लोग इकट्ठे हो गये थे मगर अब क्या हो सकता था । गुस्से के मारे लडकी का बुरा हाल था । किसी ने कहा आप थाने मे रिपोर्ट दर्ज कर दीजिए  शायद आपकी कोई मदद हो जाये लडकी ने कुछ सोचा और टैक्सी मै बैठकर थाने की तरफ चल दी ।

☆ ☆ ☆ ☆ ☆

” क्या इडिया मे  अब भी वही सब होता है । मै बारह साल बाद इण्डिया आई और आते ही मेरा हैण्ड बैग बीच रास्ते मे ही लुट लिया । आप मेरी रिपोर्ट लिखे मुझे मेरा सामान तुरन्त मिलना चाहिए ” जामिया नगर थाने मे सब इंस्पेक्टर पर बुरी तरह बिखर रही थी रवि बार बार मेडम  कर रहा था मगर वो सुन ही नही रही थी कि जैसे हैण्ड बैग चोर ने नही पुलिस ने चुराया हो ।

बडी मुश्किल से वो शान्त हुई जब बोलते बोलते थक गई ।रवि ने पानी का गिलास थमाया तो उसने इस तरह गिलास पकडा जैसे कोई एहसान कर रही हो ।

” मैडम हम आपकी रिपोर्ट लिख रहे है और कोशिश होगी कि लुटेरा जल्दी से जल्दी पकडा जाये ” रवि ने कहा तो वो कुछ नही बोली ।

राजन थाने पहुंचा कुछ गहमा गहमी का माहौल हुआ शायद कोई लडकी तेज तेज आवाज मे कुछ कह रही थी उसने जीप खडी करकेअंदर आफिस की तरफ बढऩे लगा ।

” ठीक है आप जल्दी से जल्दी लुटेरे को पकडडिये मुझे जरूर बताइयेगा ।”

5राजन को कुछ आवाज जानी पहचानी सी लगी ! उसने पलटकर पहली बार लडकी की तरफ देखा!

धडाम…धडाम..

राजन को ऐसा लगा जैसे उसके सिर पर आसमान टूट पडा हो ! वह हैरत से उस लडकी को देखे जा रहा था जो पता नही क्या क्या कह रही थी! दिमाग सुन्न हो चुका था ! जुबान को जैसे लकवा मार गया! वह लडकी जा चुकी थी मगर राजन बुत बना हुआ खडा था ! दिमाग सायँ सायँ कर रहा था!

” सर क्या हुआ सर?” रवि ने पास आकर कहा मगर वो वैसे ही बुत बना खडा रहा!

***

काफी देर बाद राजन को जैसे होश आया मगर हैरत उसके चेहरे पर अब भी मौजूद थी!

” रवि यह लडकी कौन थी” राजन वियग्रता से पूछाँ!

” सर यह रूचि थी ! लन्दन से आई है बारह साल बाद और आते ही लुटेरे ने हैन्डबैग छीन लिया” रवि कहता रहा मगर राजन का ध्यान कहीं और था ! वह सकते की हालत में था!

” वही है यह बिल्कुल वही ” राजन ने खोये खोये लहजे में कहा!

” कौन सर …कौन सी लडकी?” रवि ने हैरत से पूछाँ !

” वही लडकी जिसका खून होते मैने सपने में देखा था” राजन ने जैसे धमाका किया !

” क्या….य..ह.. कैसे हो सकता है” रवि ने हैरान होकर बस इतना ही कह सका !

” मै सच कह रहा हूँ रवि यह वही लडकी है”

” सर कहीं आपको वहम तो नही हुआ..”

” नही रवि यह वही लडकी है और तुमने देखा नही उसके हाथ में वही ब्रैसलेट जिसपर अग्रेंजी में R लिखा था” रवि को यकीन करना पडा कि शायद सर सही कह रहे है वरना इतने इत्तिफाक नही हो सकते !

” सर अगर यह वही लडकी है तो लगता है आपको पूर्वाभास हुआ है तभी आपको लगातार वही सपना बार बार आ रहा है” रवि ने कहा तभी राजन का फोन बज उठा ! दूसरी तरफ वीणा थी!

” हैलो राजन ,मैं गुडगाँव के लिये निकल रही हूँ ”

” ठीक है मगर जल्दी आना”

६” मै कोशिश करूगीं और अपना ख्याल रखना” इतना कहकर फोन डिस्कनैक्ट हो गया ! फोन मेज मपर रखते हुए राजन ने कहा !

” रवि तुम क्या कहते हो इस बारे में क्या इसी लडकी का कत्ल होने वाला है?”

” सर यकीन तो होता नही मगर आपका सपना सच हुआ तो यकीनन इसी लडकी का कत्ल होगा ”

” कमाल है रवि हमारे सामने यह अजीबोगरीब केस है जिसकी हम रिपोर्ट भी नही लिख सकते और हमें पहले से ही मालूम है कि कत्ल किसका होना है” राजन ने कहा तो रवि ने भी गर्दन हिला दी!

” सर एक बात बताईये कि अगर सपना झूठा हुआ तो ?”

” देखो रवि हम ये मानकर चलते है कि सपना सच है तभी हम ठीक से सोच पायेगें नही तो पता नही हम सोचते रहे और कातिल कामयाब हो जाए ” राजन बोला! ” ठीक है सर आप सही कह रहे है”

” मगर रवि कत्ल कब होगा ये हमे नही मालूम ,आज भी हो सकता ,कल भी हो सकती है ! महीना भी लग सकता है फिर पता कैसे चलेगा कि कत्ल कब होगा तभी हम कुछ कर सकेगें वरना नही”  राजन ने निराशा के साथ कहा तो रवि ने कुछ सोचते हुए कहा-

” सर आप अपने सपने को जरा गौर से समझने की कोशिश करे जरूर उसमे कुछ ऐसे सकेंत होगें जो हमारी मदद कर सके तभी तो आपको यह सपना दिखाई दिया है” कहकर रवि चुप हो गया ! राजन वाकई सिगरेट सुलगाकर सपने पर गौर करने लगा! काफी देर बाद राजन ने आखे खोली ! कुर्सी पर सीधा बैठते हुए रवि से कहा-

” रवि आमतौर पर कोई आदमी बैड पर कैसे सोते है”

“सर सीधी सी बात है सीझी अवस्था में या करवट लेकर मगर कभी कभी उल्टी अवस्था में भी ” रवि ने कहा तो राजन बोला-

” मगर रूचि बैड पर आडी तिरछी अवस्था में थी और सिर पायते की तरफ ना होकर बैड पर बीचो बीच थे और हाथ बेतरतीब लटके हुए! लग ही नही रहा था कि जैसे वो नाॅर्मल तरीके से सो रही हो ऐसा लग रहा था जैसे उसे होश ही नही हो” रवि ने प्रभावित होकर कहा ” आप सही कह रहे है और सर एक बात और है कि रूचि बैड पर सोते वक्त जीन्स टाॅप पहने हुई थी जबकि लोग गाऊन का इस्तेमाल करते है” हो सकता है वो होश मेंन हो या फिर ज्यादा थक गई हो ”

” बिल्कुल रवि ऐसा हो सकता है मगर वो कत्ल वाले दिन ऐसा कौन सा काम करेगी जिसकी वजह से वो थक सकती है और ऐसी अवस्था में सोयेगी”!!!

” मगर सर एक बात अब भी अहम है कि उसका कत्ल कयो होगा जबकि

वो लण्डन से भारत बारह साल बाद आई है इतने मे उसके कहा से दुश्मन पेदा हो गये ”

” रवि ने बिलकुल सही कहा था सो राजन बोला

” यह तो बाद मे पता चलेगा आखिर उसका कत्ल कयो और किस उद्देश्य से होगा ?

फिलहाल हमे यह सोचना होगा आखिर क्त्ल कब होगा यह है तो तय ह कि कत्ल जब भी होगा रात को होगा क्योंकि नाइट बल्ब का जलनासाफ बताता है कि रात का वक्त था । ”

आफिस मे सन्नाटा छा गया । सही सवाल अहम था कि कत्ल कौन से दिन होगा । दिमाग सुन्न हो गया था । राजन जहन पर जोर देकर सोच रहा था कि कुछ तो ऐसी बात होगी । कि जो बताती हो कि कत्ल कौन से दिन होगा ।

अचानक दिमाग मे धमाका हुआ । राजन ने पटाक से आखे खोल दी । उसकी आख  मे चमक उभर आई । चेहरे पर रौनक सी आ गई उसने रवि की तरफ देखकर कहा ” देखो रवि मैंने सपने मे देखा था कि जो नकाबपोश अन्दर आया था उसका सारा शरीर  पानी से भीगा हुआ था और पानी फर्स पर टपक रहा था । इसका मतलब उस रात बारिश हो रही थी मतलब जब भी बारिश होगी समझो उसी रात कत्ल होगा ।

” मगर सर अब हमे कैसे मालूम होगा कि बारिश कब होगी और मान लिजिए उस रात बारिश होगी मगर हो सकता है हम कही और हो । बादल तो आधे घण्टे मे भी बन जाते है और अचानक बारिश हो सकती है ” रवि ने बिलकुल सही कहा था ।

ऐसे मे वो कही भी हो सकते थे । क्या पता बादल कब बन जाये और जितनी देर मे पहुंचे कत्ल हो जाये ।

” रवि ” राजन ने कहा ” बात तो सही  है । सवाल फिर वही हे बारिश किस वक्त होगी ? ”

” सर हम रुचि को सपने के बारे मे बता दे तो हो सकता है वही अपने बचाव का रास्ता ढुढ ले । सतर्क हो जाये ” रवि ने अपनी तरफ से सही कहा था मगर राजन के चेहरे पर असन्तुष्ठटता के भाव थे तभी उसने कहा

” रवि हमारी बात पर कोई यकीन नही करेगा । इसलिए हमारा रुचि को सपने के बारे मे बताना ठीक नही होगा । बल्कि उल्टा हमारा मजाक बनेगा अभी तो हम भी ठीक से  यकीन नही कर पा रहे है । ऊपर से वो हमे नही जानती  तो वो हमारी बात पर विश्वास नही करेगी  ”

इसी विचार विमर्श पर कब छ: बज गए पता ही नही चला  । दिमाग भी दोनो का थक चुका था अत: राजन ने घर जाने का फैसला किया और जीप घर की तरफ मोड दी ।-

रात 9 बजे का वक्त था । राजन खाना खाने के बाद कॉफी पीने की इच्छा महसूस कर रहा था। उसके दिमाग मे अब भी सपने की बाबत चल रही थी । उसे अजीब सा लग रहा था । वह अब रोमांचित हो रहा था । वह ऐसे केस पर काम कर रहा था जिसमे कत्ल होने वाला था । उसका दिमाग बुरी तरह उलझा हुआ  था कि आखिर उसे ही क्यो ये  आभास हुआ था कि एक अन्जान लडकी का कत्ल होने वाला था । वह सोच रहा था कि जनवरी के महीने मे बारिश नाम मात्र की होती है । मगर आजकल मौसम

 

बिल्कुल साफ था । ऐसे मे बारिश कब होगी । उसका दिमाग ठस्स हो चुका था । यही सब सोचते हुए उसने टी0 वी0 आन कर के समाचार पर लगा दिया और कॉफी बनाने के लिए किचन मे चला गया ।

उसने अपने लिए कॉफी बनाई और मग मे डालकर वापस टी वी रुम मे आया तो उसके हाथ से कॉफी गिरते गिरते बची । हैरान सा वह खडा रह गया । नजरे टी0 वी0 पर चिपक कर रह गई । कारण था वह रिपोर्टर जिसने यह खबर सुनाई थी कि मौसम विभाग के अनुमान अनुसार कल शाम को तेज बारिश हो सकती है ।

राजन ने खबर सुनी तो शरीर मे सिहरन सी दोड गई । उसने तुरंत रवि का नम्बर डायल किया ।

“हैलो ” रवि की आवाज उभरी ।

“रवि तुमने टी.वी पर खबर सुनी ? ”

” नही सर कौन सी खबर ? ” रवि ने महसूस कियाकि राजन सर उत्तेजित से है  ।

“रवि रिपोर्टर के मुताबिक मौसम विभाग ने कल रात की भारी बारिश के आसार बताये है ” राजन ने एक ही सांस मे सारी बात बताई ।

” क्या सर ” रवि भी हेरानी मे पड गया था उसे लगने लगा था कि सपना वाकई मे सच्चा था ।

” रवि एक काम करो ”

” क्या सर बताइये ”

” तुम कल से रुचि की निगरानी करो और देखो वो कंहा जाती है और क्या करती है ? हो सकता है कातिल उसका पिछा कर रहा हो ” राजन ने रवि को निर्देश दिए ।

” जी सर मे उसकी निगरानी करता हु । रिपोर्ट मे उसने अपना पता करोलबाग मे कोई कोठी है उसकी । मे सुबह पहुंच जाऊंगा ।

” और रवि मुझे रिपोर्ट देते रहना ”

” जी सर ” ईतना कहकर राजन ने फोन काट दिया । वह अजीब सा रोमांच महसूस कर रहा था । धडकने बढ गयी थी । नींद आखो से ओझल हो चुकी थी । पता नही कितनी देर वह सोचो मे डुबा रहा ।

सुबह राजन उठा तो 9 : 30 बज चुके थे । रात को देर से सोया था । वही सपना फिर दिखाई दिया था उसे । अब वो परेशान नही हुआ सपने की वजह से । तेयार होकर वह थाने पहुँचा ।

अपने केबिन मे आया ही था कि रवि का फोन आ गया । उसने बताया कि रुचि अभी कोठी से बाहर नही निकली है । कोई विशेष बात नही थी । मौसम साफ था । धुप निकली हुई थी ऐसा लग ही नही रहा था कि आज बारिश भी हो सकती है । पता नही बारिश होगी   भी या नही । राजन यही सोच रहा था । फिर वो फाइल मे मगन हो गया । 12 : 30 बजे रवि का फोन आया । राजन ने कोल रिसीव की “हैलो” दूसरी

तरफ रवि ने कहा ” सर रूचि अभी अभी बाहर निकली है और अपनी गाडी में बैठ कर तिलक रोड पर गई है! मै आॅटो से पीछा कर रहा हूँ ” !

” ठीक है रवि देखते रहना कोई उसका पीछा तो नही कर रहा है” राजन ने कहा ! ” जी सर ,और हाँ सर रूचि ने काली जिन्स और लाल टाॅप पहन रखा है जैसा कि आपने सपने में देखा था”

” बहुत बढिया रवि शायद सपना सच्चा है  अब लग रहा है कि हम सही रास्ते पर है” फोन डिस्कनेक्ट करते हुए उसने देखा कि आसमान पर काले बादल उमड आये थे ! राजन रोमाचिंत हो गया! रवि के मुताबिक रूचि पहले तिलक रोड पर किसी रेस्टोरेन्ट में गई थी ! वहाँ से वह तीन बजे निकली थी और फिर किसी बार में गई थी!

****

राजन शाम आठ बजे घर पहुचाँ ही था जब रवि का फोन आया !

“हाँ रवि क्या खबर है ”

” सर रूचि बार से निकल चुकी है और सर, उसके कदम भी लडखडा रही है ! शायद ज्यादा पी रखी है” रवि ने कहा!

” यही कारण था रवि जिसकी वजह से वो बैड पर आडी तिरछी सोई थी”

” जी सर वैसे मुझे कोई सन्दिग्ध आदमी उसके आस पास नही दिखा है वो अपनी कोठी के पास पहुचॅ गई है!

” गुड तुम वहीं कही छिप जाओ !

” सर आगे क्या करना है ” राजन ने बताया!

*****

रात साढे दस का टाईम था! जोरदार बारिश हो रही थी ! तेज हवाएँ चल रही थी ! हर जगह पानी ही पानी था ! कोठी के बाहर खडा वह नकाबपोश भी पूरी तरह भीगा हुआ था! ऊपर से नीचे तक अपने शरीर छिपाये वह धीरे धीरे उस पेड पर चढने लगा जिसकी एक डाली चार दीवारी के अन्दर कोठी की तरफ थी ! वह बडे आराम से पेड पर चढा और दोनो हाथो से डाल को पकडकर कोठी के अन्दर कूद गया ! तेज बारिश का शोर था सो उसके कूदने से हुई हलचल दब गई थी! वह धीरे धीरे कोठी के पीछे पहुचाँ और रेन वाटर पाईप पर धीरे धीरे ऊपर चढने लगा ! वह उस रूम के छज्जे पर खडा था जिसमे से हल्का उजाला झांक रहा था जहाँ पर वह खडा था वह खिडकी थी !उसने जेब से शीशा काटने का हीरा निकाला और गोलाई में शीशे पर चलाने लगा ! कटा

हुए शीशे पर उसने  कुछ रबड जैसी कोई चीज लगाइ और जब उसे वापिस खीचा तो उसके साथ मे शीशे का कटा हुआ गोल हिस्सा भी चिपक कर आ गया था । अब खिडकी के शीशे मे गोल छेद हो गया था जिसके अन्दर हाथ डालकर उसने खिडकी की चिटकनी खोल दी ।

थोही देर वह वैसे ही खडा रहा फिर खिडकी की दीवार पर चढकर अन्दर कूद गया । क्रेपसोल के जुतो के कारण कोई आवाज नही हुई फिर भी वो कुछ पल वैसे ही रहा ।

उसने देखा रुचि बैड पर  आडी – तिरछी अवस्था मे पडी थी । वह घुमकर उसके चेहरे की तरफ आया एक हाथ कोट के अन्दर था । अगले पल उसके हाथ मे रिवाल्वर था । उसने एक हाथ से रुचि का कंधा पकडकर घुमा दिया । रुचि ने कुनमुना कर आखे खोली और हैरत से जाम होकर रहकर रह गई । एक अन्जान व्यक्ति को देखकर वह डर के मारे काप रही थी । बडी मुश्किल से बोली ” कौ —–कौन हो तुम ?

मगर नकाबपोश कुछ नही बोला । उसके शरीर से पानी टपक रहा था ।

” बताग क्यो नही ——–यहा कैसे आये तुम ——मुझे कयो मारना चाहते हो ? मगर नकाबपोश कोई जवाब नही देना चाहता था । उसने हाथ सीधा किया । उगंलिया ट्रिगर पर कसने लगी । रुचि के चेहरे पर खौफ ही खौफ था । वह भय से काप रहीं थी ।

नकाब पोश ने ट्रिगर दबाया  धांय धांय गोली की आवाज से इलाका थर्रा गया । गोली नकाब पोश के हाथ मे लगी थी वह चीख कर अपने हाथ को पकडे वही बैठ गया । नकाबपोश द्वारा चलाई गोली दीवार पर लगी थी । रुचि ने जब देखा कि नकाब पोश उसे मारना चाहता है । तो उसने उसकी तरफ ही छलांग लगाई थी  । वह वही फर्स पर पडी थी ।

कुछ देर किसी की समझ नही आया तभी परदे के पीछे से इंसपेक्टर राजन बाहर निकला  उसने नकाबपोश को दबोच लिया ।

बाहर दरवाजे पर दस्तक हुई । दरवाजा जोर जोर से खटखटाया जा रहाथा ।

” मैडम आप दरवाजा खोलिये । राजन ने रुचि से कहा तो रुचि ने अपने आप को सभालते हुए दरवाजा खोल दिया । राजन ने नकाबपोश को रिवाल्वर से कवर कर रखा था । सब–इंस्पेक्टर  रवि अन्दर आया । एक पल मे ही वो मामला समझ गया था ।

” रवि पहले इसका नकाब उल्टा करो देखे आखिर यह कौन है ? ”

रवि ने नकाब पोश का हैट और नकाब उलट दिया ।

” तुम ”

” तुम ” यह वाक्य राजन और रुचि के मुंह से एक साथ निकला । हैरत के मारे किसी के मुंह से बोल नही निकला । राजन फटी फटी आंखो से उसका चेहरा देख रहा था । जो कोई और नही वीणा थी । उसकी गर्लफ्रेंड वीणा । रुचि भी कम हेरान नही थी कि आखिर कातिल यह निकलेगी ।

बहुत देर बाद राजन ने कहा ” वीणा तुम हो कातिल  ” मगर वीणा के मुंह एक शब्द नही निकला ।

” तुम रुचि का कत्ल क्यो करना चाहती आ  ”

राजन ने कठोर लहजे मे कहा

: “रूचि मेरी कजिन है ” वीणा ने काँपते हुये कहा

“कजिन है मगर तुमने कभी बताया नही ” राजन ने पुछा । तो वीणा उन्हे बताती चली गयी ।

” राजन रूचि 12 सालो से लंदन मे थी इसलिए शायद मैने तुम्हे नही बताया।रूचि के मा बाप एक एक्सीडेंट मे मर चुके थे।यह करोडपति थी । मेरी इच्छाए थी कि मै भी अमीरो वाले शोक करती । महंगी गाडियो मे घुमती । तुमसे शादी करके ऐश भरी जिन्दगी गुजारती । ” क्योंकि रूचि के मरने के बाद उसकी दोलत की वारिस मै होती । वीणा कहती गई ।

” मगर तुम्हे कैसे मालूम कि यह कल ही इण्डिया आने वाली थी” राजन ने पुछा

” कभी-कभी  मेरी रुचि से बात हो जाती थी । इसी ने मुझे बताया था। कि यह कल आने वाली थी । तो मैने गुडग़ांव शादी मे जाने का ड्रामा किया और वहा एक रात होटल मे बिताकर आज सुबह ही दिल्ली आ गई थी ।

” वीणा व रुचि के कत्ल से तुम्हे इसकी दोलत कैसे मिलती ? राजन ने फिर उससे पुछा । अगर यह मर जाती तो मै ही इसकी वारिस होती मतलब मेरे मा – बाप , तो इस तरीके से मै अमीर हो जाती ” विणा सर झुकाकर बोली ।

” मगर अब तुम जेल जाओगी मुझे अफसोस है मैने तुम जैसी लडकी से प्यार किया ” राजन अफसोस से बोला । पहली बार रुचि इस बीच बोली । उसने राजन से कहा कि आपको कैसे पता चला कि यह मुझे मारने वाली है ? राजन ने उसे सपने से लेकर उसके बाद से निकलने तक सब कुछ बताया । रुचि हैरत से सब कुछ सुन रही थी । उसने सोचा भी नही था  कि  आज  उसकी जान एक सपने की वजह से बची है । यही सब सवाल वीणा के दिमाग मे भी थे तो वह भी हैरत से राजन का मुह ताकने लगी ।

” और मेडम जब आप बार से निकली तो मैने यह खबर सर को दी ” रवि ने भी आगे का वाकया बताया ” तभी सर ने कहा कि तुम की का इन्तजाम करो । मैंने मास्टर की सर को दी जिससे यह रुचि के बेडरूम के परदे की ओट मे छिप गये और मै बाहर छिप कर बेठा था कि कोई ऐसी -वेसी घटना हो तो सभालू” इतना कहकर रवि चुप हो गया ।

वीणा को जेल भेज दिया गया था । कोई सबूत की बात नही थी वह रंगे हाथो पकडी गई थी । रुचि ने राजन   ओर  रवि का शुक्रिया अदा किया । आखिर उन्ही की वजह से वो जिन्दा थी ।

राजन को वीणा से ऐसी उम्मीद नही थी । वह सोच रहा था कि ऊपर वाले ने उसे सही वक्त पर पूरवा भास कराया था ।

 

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