#Kahani by Madhu Mugdha

भौजी..

ये मेरी सच्ची कथा है

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अचानक ये शब्द सुनकर मैं चौंक गयी और पलट कर देखी तो..

एक छोटी सी बच्ची मुझे पुकार रही थी

और मैं अतीत की यादों में खो गयी ….

बात उन दिनों की है जब मैं कलकत्ता के जालान गर्ल्स कालेज में पढ़ती थी क्लास 9th की छात्रा थी। मुझे सुबह स्कूल जाना पड़ता था। मेरी माँ को कैंसर था। मैं जिस मकान में रहती थी वहां पर बहुत सारे किराएदार रहते थे। वे किस जाति के थे तब हम नहीं जानते थे !!

बस इतना की ये चंचला मौसी है ,पुष्पा चाची ,है या ठकुराइन, भाभी है।

हम पाँचवी मंजिल में रहते थे।

हमारे नीचे वाली मंजिल में ठकुराइन भौजी रहती थी!! सभी उन्हें इन्हीं नाम से जानते थे।

मैं जब भी स्कूल के लिए निकल कर जाती खिडकी पे भौजी खडी रहती ! इशारे से बुलाती और कहती क्यों री टीफीन लिया ,मैं गर्दन हीला देती हाँ। और वो मेरा बैग चेक करती जैसे उन्हें पता हो और जो कुछ भी नाश्ते में बना होता मेरे खाली टिफिन में दे देती !

ये उनका अब रोज का नियम बन गया था। पहले मैं समझ नहीं पाती एैसा वो क्यों करती है !

लेकिन काफी दिनों बाद पता चला कि वह जैसे अपना धर्म निभा रही थी। मेरे भाई से उनकी शादी तय हुई थी। वो एक दूसरे को प्यार करते थे। मेरी माँ भी राजी थी वो बहुत सुंदर थी लेकिन काफी गरीब थी। पर शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक ट्रक हादसे में भइया की मौत हो गई और बेचारी भाभी को उनके घर वालों ने उनसे 18 साल बढे ठाकुर भइया से शादी कर दी। लेकिन वो अपना एक फर्ज निभाती रही वो मेरे साथ प्यार का ..

नन्द भाभी का अाज इस बात को 27 साल बीत गए माँ के गुजर जाने के बाद हम यूपी में सेटल हो गये।

पता नहीं अब वो कहां हैं

लेकिन जब भी ये सम्बोधन सुनती हूँ तो

मन विचलित हो जाता है

और सोचने लगती हूँ कि आखिर उनका मेरा रिश्ता क्या था …???

और चल पड़ी एक नये रिश्ते को निभाने नन्द -भौजी का

आजकल क्या एैसे रिश्ते हैं ?????

…..#मधु

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